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11 मार्च 2010
चीनी मिलों की लॉबिंग के आगे झुकी सरकार
चीनी मिलों की लॉबिंग के आगे लगता है कि सरकार ने घुटने टेक दिए हैं। हर सप्ताह कोटे की चीनी बेचने के कारण दबाव में आई कंपनियां चाहती हैं कि चीनी बिक्री के कड़े नियमों से रियायत दी जाए। मिलों को चीनी के दाम और गिरने की चिंता सता रही है। सरकार चीनी का साप्ताहिक कोटा बेचने के लिए अगले सप्ताह की मोहलत देने जा रही है। शुगर निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार मिलें साप्ताहिक कोटा एक सप्ताह के बजाय दो सप्ताह में बेच सकेंगी। इस अधिकारी ने बताया कि सरकार से मंजूरी लेने के बाद चीनी निदेशालय ने यह रियायत देने का फैसला कर लिया है। जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। यह रियायत मिलने के बाद चीनी मिलों पर साप्ताहिक कोटा बेचने का दबाव कम हो जाएगा। अभी तक चीनी के मूल्य में तीखी गिरावट साप्ताहिक कोटा व्यवस्था के कारण ही आई है। नए नियम के अनुसार मिलें बेहतर मूल्य पाने के लिए दो सप्ताह में कभी भी चीनी बेचने के लिए स्वतंत्र होंगी। हालांकि, इससे बाजार में चीनी के दाम फिर से बढ़ने का पूरा आधार तैयार हो गया है। नए नियम के तहत मिलें कोटे की चीनी दो सप्ताह तक स्टॉक में रख सकेंगी। इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता में कमी आने की आशंका है जिसका असर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर पड़ सकता है। आम उपभोक्ता को अभी भी चीनी 38-39 रुपये प्रति किलो की दर पर मिल रही है। ऐसे में सरकार के इस फैसले से लगता है कि उसने इस मूल्य को न्यूनतम स्तर मान लिया है। इसलिए सरकार मिलों को साप्ताहिक कोटे की चीनी की बिकवाली के लिए एक और सप्ताह की मोहलत देने जा रही है। चीनी की ऊंची कीमतों से परशान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी में मिलों के लिए नॉन लेवी (फ्री-सेल) चीनी की बिक्री का साप्ताहिक कोटा तय कर दिया था। बिक्री निर्देश के अनुसार मिलों को पहले सप्ताह में 20 फीसदी कोटा खुले बाजार में बेचना होता है। इसी तरह दूसर सप्ताह में 30 फीसदी तथा तीसर और चौथे सप्ताह में 25-25 फीसदी कोटे की चीनी की बिक्री करनी पड़ती है। अगर मिलें इस अवधि में निर्धारित कोटा बाजार में नहीं बेच पाती हैं तो बची हुई चीनी को लेवी के रूप में सरकार काफी सस्ते दामों पर ले लेती है। लेवी चीनी की कीमत खुले बाजार के मुकाबले करीब 2000 रुपये प्रति क्विंटल कम है। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)
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