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04 फ़रवरी 2010
गन्ना किसान करेंगे FMCG और ऑटो फर्मों का मुंह मीठा
नई दिल्ली : देश के ग्रामीण इलाकों में गन्ने के बदले मिलने वाली रकम से मिठास बढ़ने की उम्मीद है। गन्ने की तंगी से जूझ रही चीनी कंपनियों की ओर से इस साल गन्ना किसानों को दी जाने वाली रकम दोगुनी होकर 40,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाने का अनुमान है। किसानों के पास यह रकम जाती देख कॉस्मेटिक्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक गुड्स और मोटर साइकिल जैसे उत्पाद बेचने वाली कंपनियों की बाछें खिल गई हैं क्योंकि इसके कारण ग्रामीण भारत में इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चीनी मिलें किसानों को जोरदार भुगतान कर रही हैं क्योंकि वे पिछले 25 वर्षों से भी ज्यादा समय के रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रही चीनी के दाम से अधिक से अधिक मुनाफा काटने की फिराक में हैं। समाज के एक तबके से दूसरे तबके के हाथ इतनी बड़ी रकम जाने से खर्च के मोर्चे पर उसी तरह का असर सामने आ सकता है जो पिछले साल सरकारी कर्मचारियों को उनके वेतन के एरियर के भुगतान के कारण आया था। ई-चौपाल के जरिए करीब 40 लाख किसानों से जुड़ी आईटीसी के एग्री बिजनेस डिवीजन के मुख्य कार्यकारी एस शिवकुमार ने कहा, 'फसलों के समर्थन मूल्यों के साथ नरेगा जैसे सरकारी कार्यक्रमों से ग्रामीण आमदनी को सहारा मिला है। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्रों में कंज्यूमर गुड्स के लिए मांग बढ़ी है।' केंद्र सरकार ने गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) करीब 130 रुपए प्रति क्विंटल रखा है, लेकिन किसानों को इससे ज्यादा भाव मिला है। उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों ने 245 रुपए प्रति क्विंटल, महाराष्ट्र में 300 रुपए और तमिलनाडु में 200 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान किया। तीन साल पहले किसानों को बमुश्किल 90 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिला था। चीनी उद्योग के अनुमान के मुताबिक, किसानों ने इस साल करीब 16 करोड़ टन गन्ना बेचा है जिसका मतलब यह हुआ कि उन्हें 19,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने हैं। गन्ने के ऊंचे दाम लगने का असर ग्रामीण इलाकों में रीटेलरों की बिक्री पर नजर आ रहा है। आठ राज्यों में 300 से अधिक आउटलेट के जरिए मौजूद ग्रामीण रीटेल चेन हरियाली किसान बाजार का कहना है कि अक्टूबर-दिसंबर 2009 में एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री अक्टूबर-दिसंबर 2008 की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ी है। बॉडी लोशन की बिक्री 50 फीसदी, बेबी सोप की 200 फीसदी, डियोड्रेंट की 50 फीसदी और हेयर ऑयल की बिक्री 80 फीसदी बढ़ी है। भारत की एक दिग्गज चीनी कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'विदेशी संस्थागत निवेशक और अन्य निवेशक अब हमारे प्रजेंटेशन को गौर से देखते हैं जिसमें बताया जाता है कि हम पेराई के लिए कितना गन्ना खरीद रहे हैं। उसके बाद वे एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयर खरीदते हैं।' हालांकि, सबके चेहरे पर खुशी नहीं है क्योंकि कंज्यूमर गुड्स बाजार में होड़ बढ़ रही है। अमेरिकी सिक्योरिटीज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने भारतीय कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के शेयरों की रेटिंग घटाकर 'सतर्कता' वाली श्रेणी में डाल दी है। उसने इसके लिए छोटी कंपनियों की ओर से बढ़ती होड़ का हवाला दिया है। हरियाली किसान बाजार के एक शीर्ष अधिकारी ने पहचान जाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, 'कंज्यूमर ड्यूरेबल सेगमेंट में बिक्री अभी तेज नहीं हुई है क्योंकि अधिकतर परिवारों के लिए इस मोर्चे पर खरीदारी बड़ा फैसला होता है। एफएमसीजी उत्पादों पर पहले खर्च करना काफी आसान होता है। खरीफ की फसल खराब होने के कारण कई परिवारों पर कर्ज का बोझ भी है। लिहाजा ऐसे परिवार तो पहले अपना कर्ज चुका रहे होंगे।' सैमसंग इंडिया के उप प्रबंध निदेशक आर जुत्शी ने कहा, 'कैलेंडर वर्ष 2009 की अंतिम तिमाही में हमने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में देश के अन्य भागों की तुलना में ज्यादा बिक्री देखी।' उन्होंने कहा कि आखिरी तिमाही में इससे पहले वाली तिमाही की तुलना में कंपनी की औसत बिक्री 7-8 फीसदी बढ़ी। (ई टी हिन्दी)
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