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11 फ़रवरी 2010
विदेश में सुस्ती के बावजूद भारत में कॉटन महंगी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन की कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू मंडियों में दाम बढ़े हैं। न्यूयार्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में कॉटन के मार्च वायदा अनुबंध के भाव पिछले दस दिनों में 3।4 फीसदी घटकर 66.62 सेंट प्रति पाउंड रह गए। जबकि घरेलू बाजार में पिछले दस दिनों में शंकर-6 कॉटन की कीमतें 1.1 फीसदी बढ़कर सोमवार को 26,000-26,300 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) हो गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटने का असर घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों पर पड़ने की संभावना है। नॉर्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चीन में लोन पर सख्ता होने से वहां की मांग में कमी आई है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन का सबसे बड़ा खरीददार चीन था, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के दाम पिछले दस दिनों में 3.4 फीसदी घट चुके हैं। 29 जनवरी को न्यूयार्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में कॉटन के मार्च वायदा अनुबंध के भाव 69.03 सेंट प्रति पाउंड थे जो कि घटकर 66.62 सेंट प्रति पाउंड रह गए हैं। हालांकि इस दौरान घरेलू मंडियों में शंकर-6 किस्म की कॉटन की कीमतों में 300 रुपये की तेजी आकर भाव 26,000-26,300 रुपये प्रति कैंडी हो गए। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन की मौजूदा कीमतों में और दो-तीन फीसदी की गिरावट आई तो इसका असर घरेलू मंडियों में कॉटन की कीमतों पर पड़ने की संभावना है। टैक्सटाइल कमिश्नर ऑफिस के सूत्रों के अनुसार चालू सीजन में पहली सितंबर से 31 जनवरी तक 51 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) के निर्यात सौदे पंजीकृत हुए हैं हालंकि इनमें से शिपमेंट मात्र 27 लाख गांठ की हुई। कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष डी. एन. सेठ के अनुसार चालू सीजन में 31 जनवरी तक मंडियों में कॉटन की 180 लाख गांठ की आवक हो चुकी है। चालू सीजन में कॉटन का उत्पादन 302 लाख गांठ होने का अनुमान है। नई फसल के समय बकाया स्टॉक 71.50 लाख गांठ और नौ लाख गांठ आयात अनुमान को मिलाकर कुल उपलब्धता 382.50 लाख गांठ बैठने की संभावना है। मिलों की सालाना खपत 207 लाख गांठ और निर्यात 65 लाख गांठ तथा करीब 30 लाख गांठ अन्य खपत को मिलाकर सालाना कुल खपत 312 लाख गांठ की होने का अनुमान है। ऐसे में सितंबर 2010 में नई फसल के समय करीब 70 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचने के आसार हैं। इस समय उत्तर भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में दैनिक आवक 12 हजार गांठ, गुजरात की मंडियों में 40 हजार गांठ और महाराष्ट्र की मंडियों में 25 हजार गांठ की दैनिक आवक हो रही है। (बिज़नस भास्कर)
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