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05 फ़रवरी 2010
कंपनियों के लिए चीनी कम, ग्राहकों को मिलेगी राहत
नई दिल्ली : चीनी के दाम पर काबू पाने की एक और कोशिश में सरकार इस कमोडिटी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए भंडारण अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने पर विचार कर रही है। भंडारण अवधि घटने से फूड सेगमेंट की बड़ी कंपनियों को अप्रैल तक की अपनी जरूरत की चीनी के लिए घरेलू बाजार के बजाय आयात का रास्ता चुनना पड़ सकता है। सरकार के इस कदम से घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ सकती है और फिलहाल 45-47 रुपए प्रति किग्रा. पर चल रही चीनी 35-40 रुपए पर आ सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि खाद्य मंत्रालय फूड कंपनियों को चीनी की जरूरत पूरी करने के लिए अप्रैल तक आयात की राह पकड़ने की इजाजत दे सकता है, जिसके बाद अगर कंपनियां घरेलू बाजार से बड़ी मात्रा में चीनी उठाएंगी, तो आवश्यक कमोडिटी एक्ट (ईसीए) के तहत उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।तीन महीने की जरूरत के लिहाज से चीनी का भंडार करने का दबाव विशेष रूप से जिन कंपनियों पर है, उनमें नेस्ले, पेप्सी, कोक, कैडबरीज, ब्रिटानिया, पारले जैसी कोला, बिस्कुट, चॉकलेट, आइसक्रीम तथा अन्य फूड कंपनियां हैं। इसके अलावा, चीनी को एडिटिव के रूप में इस्तेमाल करने वाली रियल, ट्रॉपिकाना और सफल जैसी फूट जूस इकाइयों तथा पोटेबल अल्कोहल उद्योग पर भी असर होगा। आधिकारिक सूत्र ने बताया, 'अगर उन्हें घरेलू चीनी उत्पादन का इस्तेमाल करने से रोक दिया जाएगा और वे अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हो जाएंगी, तो खुले बाजार में ज्यादा चीनी उपलब्ध होगी तथा खुदरा दाम 35-40 रुपए प्रति किलोग्राम तक आ जाएंगे।'भारत में चीनी के सालाना उपभोग का लगभग 20 फीसदी हिस्सा बड़ी फूड कंपनियां ही इस्तेमाल करती हैं। यह मात्रा लगभग 45 लाख टन है। कुल मिलाकर देश में चीनी का सालाना औद्योगिक उपभोग कुल उपभोग का 60 फीसदी है। भारत में कुल मिलाकर 2.3 करोड़ टन चीनी तैयार होती है। उम्मीद है कि इस सीजन में घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए देश पर आयात करने का दबाव कुछ कम रहेगा। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम गिरने तय लग रहे हैं। सूत्रों ने कहा, 'इस नए नियम की वजह से चीनी की जरूरतों को लेकर कंपनियों को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती से गुजरना होगा। इसका अर्थ यह होगा कि वे अगले 10 दिनों की औद्योगिक जरूरतों के लिए घरेलू बाजार से चीनी का भंडार 10 दिनों के रनिंग पीरियड में जमा नहीं कर सकेंगी। इतनी कम अवधि में अपनी गुणवत्ता के हिसाब से घरेलू बाजार से बड़ी मात्रा में चीनी का इंतजाम करना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा।' 15 दिन की मौजूदा स्टॉक होल्डिंग लिमिट ने पहले से ही इन फूड कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया था और उन्हें पिछले साल के अंतिम दिनों में सीधे आयात पर विचार-विमर्श करने की जरूरत तक पड़ी। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में कृषि मंत्री शरद पवार और उनके जूनियर मंत्री के वी थॉमस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर स्टॉक लिमिट से जुड़े प्रस्ताव पर ब्योरेवार तरीके से विचार-विमर्श किया था। (ई टी हिन्दी)
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