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01 फ़रवरी 2010
निर्यात मांग घटने से कॉटन के दाम गिरे
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटने और डॉलर कमजोर होने के कारण कॉटन में निर्यातकों की मांग घटी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चालू महीने में कॉटन की कीमतों में करीब 8.4 फीसदी की गिरावट आने के असर से घरेलू बाजार में कॉटन के दाम 4.8 फीसदी घट चुके हैं। उत्पादक मंडियों में करीब 165 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कपास की अभी तक आवक हो चुकी है। इस समय उत्पादक राज्यों में करीब 80-90 हजार गांठ की दैनिक आवक हो रही है लेकिन निर्यातकों की मांग कमजोर बनी हुई है इसलिए मौजूदा कीमतों में और भी नरमी की संभावना है। नॉर्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटने और डॉलर कमजोर होने से कॉटन में निर्यातकों की मांग में कमी आई है। जिसका घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों पर पड़ा रहा है। अहमदाबाद मंडी में शंकर-6 किस्म की कॉटन के दाम घटकर 25,700 से 26,000 रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) रह गए जबकि एक जनवरी को इसके भाव 27,000 से 27,300 रुपये प्रति कैंडी थे। पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन की कीमतों में 8.4 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 31 दिसंबर को न्यूयार्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में कॉटन के मार्च वायदा अनुबंध के भाव 75.60 सेंट प्रति पाउंड थे जोकि घटकर 27 जनवरी को 69.23 सेंट प्रति पाउंड रह गए। कॉटन व्यापारी संजीव गुप्ता ने बताया कि उत्पादक मंडियों में कॉटन की दैनिक आवक 80-90 हजार गांठ की हो रही है जबकि निर्यातकों के साथ-साथ मिलों की मांग पहले की तुलना में घटी है। इसीलिए मौजूदा कीमतों में और भी नरमी की संभावना है। उत्तर भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में कॉटन की दैनिक आवक गुरुवार को 12 हजार गांठ की हुई तथा गुजरात की मंडियों में दैनिक आवक 47 हजार गांठ और महाराष्ट्र की मंडियों में 30 हजार गांठ की हुई। महाराष्ट्र और गुजरात की मंडियों में दैनिक आवक पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम हो रही है। पिछले साल इस समय गुजरात की मंडियों में 55 हजार और महाराष्ट्र की मंडियों में 60 हजार गांठ की आवक हो रही थी। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक वर्ष 2009-10 में कॉटन की पैदावार 307 लाख गांठ होने की संभावना है। (बिज़नस भास्कर)
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