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24 फ़रवरी 2010
गरीबी के आंकड़ों में उलझा फूड सिक्योरिटी बिल
देश में गरीबों की संख्या को लेकर उलझन पैदा होने से गरीबों को राहत देने वाले खाद्य सुरक्षा विधेयक में देरी हो रही है। विधेयक के मसौदे के मुताबिक गरीबी रखा से नीचे के परिवारों को मौजूदा सस्ती दरों से भी काम मूल्य पर खाद्यान्न सुलभ कराया जाएगा। इसके लिए गरीबों की नई श्रेणी बनाई जाएगी। वर्तमान में केंद्र सरकार 6।5 करोड़ परिवारों (बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना) को सस्ती दर पर गेहूं और चावल उपलब्ध करा रही है।सरकार अभी यह तय नहीं कर पाई है कि देश में गरीबों की संख्या कितनी है। योजना आयोग द्वारा गठित सुरश तेंदुलकर समिति ने गरीबी रखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या कुल आबादी के मुकाबले 41.8 फीसदी बताई जबकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से गठित एनसी सक्सेना समिति ने बीपीएल से नीचे के गरीबों की संख्या पचास फीसदी बताई है। कृषि राज्यमंत्री के. वी. थॉमस ने लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का मसौदा तैयार कर लिया गया है और इससे जुड़े तमाम पक्षों से राय मांगी गई है। इसके बाद इसको अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के सामने रखा जाएगा। उसके बाद ही इसको लोकसभा में पेश जाएगा। केंद्र सरकार ने विधेयक के मसौदे के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। इसके तहत बीपीएल परिवारों को केंद्र सरकार की तरफ से तीन रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने 25 किलो गेहूं या चावल प्रत्येक परिवार को दिया जाएगा। इस अधिनियम का उद्देश्य पीडीएस को सुदृढ़ बनाना है। अभी केंद्र बीपीएल श्रेणी के चार करोड़ परिवारों को 35 किलो गेहूं और चावल क्रमश: 4.15 रुपये और 5.65 रुपये प्रति किलो की दर से मुहैया करा रही है। इसके अलावा दो करोड़ गरीब परिवारों को अंत्योदय अन्न योजना के तहत और कम कीमत पर अनाज मुहैया कराया जा रहा है। उम्मीद है कि प्रस्तावित कानून से गरीब परिवारों को महंगाई की मार से बचाया जा सकेगा। इस समय खाद्य पदाथरे के थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर लगभग 20 फीसदी के दायर में है। मालूम हो कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले साल के बजट भाषण में भी कहा था कि सरकार जल्दी ही खाद्य सुरक्षा कानून के लिए विधेयक पेश करगी। (बिज़नस भास्कर...आर अस राणा)
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