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04 फ़रवरी 2010
निर्यात बढ़ने से कॉटन के दाम बढ़ने का अनुमान
नई दिल्ली टैक्सटाइल इंडस्ट्री को अंदेशा है कि चीन जल्दी ही कॉटन की आक्रामक रूप से खरीद शुरू कर देगा। इससे देश में कॉटन का निर्यात बढ़ने लगेगा और घरेलू बाजार में कॉटन के दाम और चढ़ने लगेंगे। आर्थिक हालात सुधरने से भारत का कॉटन निर्यात 40 फीसदी बढ़कर 50 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) तक पहुंच सकता है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री के महासचिव डी. के. नायर के अनुसार चीन में मिलें कॉटन की कमी से जूझ रही हैं। इसलिए चीन और आक्रामक तरीके से कॉटन का आयात शुरू कर सकता है। भारत से पचास फीसदी से ज्यादा कॉटन निर्यात चीन को ही हो रहा है। चीन दुनिया का सबसे बड़े कॉटन उत्पादक और उपभोक्ता देश हैं लेकिन वहां इस साल कॉटन की पैदावार गिरने का अनुमान है। अगर चीन कॉटन का भंडार करता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के दाम और बढ़ने लगेंगे। इससे भारत का निर्यात बढ़कर 50 लाख गांठ के पार निकल सकता है। (डो जोंस)इन हालातों में घरेलू टैक्सटाइल उद्योग के लिए कॉटन की सुलभता कम हो जाएगी। बीते सीजन में टैक्सटाइल उद्योग की बिक्री गिरने से कॉटन खपत की 12 फीसदी गिरकर 233 लाख गांठ रह गई थी।उद्योग के अनुमान के अनुसार भारत से 22 लाख गांठ कॉटन का सितंबर से अब तक निर्यात हो चुका है। पिछले साल इस दौरान 15 लाख गांठ निर्यात रहा था। अंतरराष्ट्रीय कॉटन एडवायजरी कमेटी के अनुसार मौजूदा सीजन में विश्व बाजार में कॉटन की खपत 2.8 फीसदी बढ़ सकती है। कुल खपत 65.6 लाख टन से बढ़कर 71 लाख टन हो सकती है। (बिज़नस भास्कर)
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