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08 फ़रवरी 2010
मिलों को बाजार में हर हफ्ते लानी होगी चीनी
भारी दबाव के चलते कृषि मंत्री शरद पवार आखिरकार चीनी की कड़वाहट कम करने के लिए कुछ सख्त उठाने जा रहे हैं। इनकी घोषणा एक हफ्ते में कर दी जाएगी। उम्मीद है कि इनसे चीनी के दाम जल्द कम होंगे। सरकार ने तय किया है कि चीनी मिलों के लिए खुले बाजार में बेचने का जो कोटा तय किया जाता है, मिलों को उस चीनी को नियमित बेचना होगा। मिलें कितनी चीनी खुले बाजार में बेच रही हैं, उसका आकलन भी अब महीने के बजाय हफ्ते में होगा। अगर चीनी मिलों ने तय कोटे के तहत चीनी को खुले बाजार में नहीं बेचा, तो बची चीनी को सरकार लेवी के तहत कम दाम में लेगी और उसे खुले बाजार में बेचेगी। गौरतलब है, उत्पादन क्षमता के मुताबिक चीनी मिलों के लिए खुले बाजार में चीनी बेचने का मासिक कोटा तय किया जाता है। चीनी मिलों को उस महीने तय कोटे को खुले बाजार में बेचना पड़ता है। लेकिन मिलों ने इस सिस्टम की आड़ में मुनाफाखोरी कर चीनी की कीमत को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। मिलों ने महीने के पहले सप्ताह तो चीनी खुले बाजार में बेची, मगर फिर 10 दिन चीनी खुले बाजार में नहीं उतारी। इससे सप्लाई कम हो गई। बाजार में जब दाम बढ़ गए तो माह के अंत में मिलों ने चीनी खुले बाजार में बढ़े दामों में बेची। इस तरह मिलों ने बेचने का कोटा तो पूरा कर लिया, साथ ही मुनाफा भी कमाया। नए नियम के अनुसार, अगर किसी चीनी मिल को खुले बाजार में 10 क्विंटल चीनी बेचना है, तो उसे हर हफ्ते ढाई क्विंटल चीनी बेचना जरूरी होगा। चीनी मसले पर कृषि मंत्री शरद पवार से मिलने के बाद एनबीटी से बातचीत में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता कन्हैया लाल गिडवानी ने कहा कि हमने कृषि मंत्री को कई सुझाव दिए हैं। चीनी की कीमत में तेजी का प्रमुख कारण जमाखोरी है। अगर सरकार ने उस पर अंकुश लगा लिया तो चीनी की कीमत 5 से 10 रुपये प्रति किलो आसानी से कम हो सकती है। (ई टी हिन्दी)
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