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03 फ़रवरी 2010
चीन में बासमती को मंजूरी अगले तीन माह में
चीन अगले दो-तीन माह के भीतर भारतीय बासमती चावल के आयात की अनुमति दे देगा। कृषि उपज निर्यात संवर्धन संगठन एपीडा के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि हाल में दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहमति बन गई है।एपीडा के चेयरमैन असित त्रिपाठी ने बताया कि चीन में संयुक्त आयोग की आयोजित आठवी बैठक में बासमती चावल के व्यापार पर सहमति बन गई है। पिछले छह-सात माह के दौरान हुई प्रगति के आधार पर हमें उम्मीद है कि अगले दो-तीन माह में हमें औपचारिक अनुमति मिल जाएगी। चीन ऐसा देश है जहां चावल का प्रमुखता से उपभोग किया जाता है। ऐसे में चीन भारतीय बासमती के लिए बड़ा बाजार साबित हो सकता है। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल में सदस्य के तौर पर बैठक में मौजूद रहे त्रिपाठी ने कहा कि अगर चीन का बाजार खुल जाता है तो भारत कम से कम 20 हजार टन बासमती चावल निर्यात करने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि बैठक में हमने चीन के मंत्रियों को बासमती के लिए बाजार खोलने के बारे में बात की थी। हमने बासमती के कीटाणु जोखिम संबंधी विश्लेषण के संबंध में भी बता दिया है। भारत से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 10।6 लाख टन बासमती का निर्यात किया गया। सरकार बासमती पर चीन में लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए कई सालों से प्रयास कर रही है। हालांकि बासमती दूसरे पड़ोसी देशों को अनौपचारिक माध्यम से निर्यात किया जा रहा है। त्रिपाठी ने कहा कि पिछले वर्षो में बासमती की बुवाई का एरिया और उत्पादन दोनों ही बढ़े हैं। ऐसे में नए बाजार तलाशने की जरूरत है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछली गर्मियों में बोई गई फसल से बासमती का उत्पादन करीब दस फीसदी बढ़कर 67 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल इस दौरान 60 लाख टन उत्पादन रहा था। सुगंधित बासमती चावल का उत्पादन मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किया जाता है। इस समय करीब पचास फीसदी बासमती संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों को निर्यात किया जाता है।बात पते कीपिछले छह-सात माह के दौरान हुई प्रगति के आधार पर उम्मीद है कि दो-तीन माह में औपचारिक अनुमति मिल जाएगी। ऐसे में चीन भारतीय बासमती के लिए बड़ा बाजार साबित हो सकता है। (बिज़नस भास्कर)
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