लखनऊ January 31, 2010
महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के बाजारों में सस्ती दाल की आवक भी संकट को कम नहीं कर सकी है। सूबे के थोक बाजारों में तो दाल की कीमत में गिरावट देखी जा रही है पर फुटकर व्यापारी दाम घटाने को तैयार ही नहीं हो रहे हैं। राजधानी लखनऊ की थोक गल्लामंडी पांडेगंज, डालीगंज और नवीन गल्ला मंडी में बीते दो सप्ताह से दाल की कीमतें काफी गिरी हैं पर फुटकर बाजारों में इसका असर नहीं दिख रहा है। दालों के थोक व्यापारी इसकी वजह मुनाफा वसूली को बताते हैं जबकि व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि अभी फुटकर व्यापारियों के पास पुराना ज्यादा दाम में खरीदा गया माल पड़ा है जिसके चलते वे कीमत नहीं घटा रहे हैं।अगर मंडियों में दालों की कीमत पर एक नजर डालें तो फर्क साफ दिखेगा। अरहर की दाल थोक मंडी में 65 से 68 रुपये प्रति किलो बिक रही है जबकि राजधानी के अलग-अलग फुटकर बाजारों में इसकी कीमत 78 रुपये से लेकर 85 रुपये के बीच चल रही है। इसी तरह उड़द की दाल की कीमत थोक मंडियों में तो 40 से 42 रुपये चल रही है जबकि फुटकर बाजार में यही दाल 70 रुपये से लेकर 77 रुपये के बीच बेची जा रही है। मसूर की लाल दाल थोक मंडी में 43 रुपये तो फुटकर बाजार में 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कमोबेश यही हाल मटर की दाल का है जो थोक बाजार में 18 रुपये तो फुटकर बाजार में 30 रुपये किलो में बेची जा रही है।लखनऊ दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता का कहना है सूबे में महाराष्ट्र की सस्ती दाल ने दस्तक दी है और इसका थोक भाव 60 रुपये है। उत्तर प्रदेश की अरहर की दाल थोक में 58 रुपये किलो मिल जा रही है। पांडेगंज व्यापार मंडल के पदाधिकारी हरिओम शर्मा का कहना है कि थोक में तो दालों की कीमत काबू में आ गयी अब फुटकर व्यापारियों को इसका लाभ जनता को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में खुद उत्तर प्रदेश की फसल जब बाजार में होगी तो कीमत और गिरेगी। उनका मानना है कि मार्च आते-आते दाल की कीमत में थोक बाजार में कम से कम 20 फीसदी की गिरावट दिखेगी। (बीएस हिन्दी)
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