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28 जनवरी 2010
सप्लाई बढ़ाने से कम होंगी कीमतें: पवार
नई दिल्ली।। यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि बेतहाशा बढ़ रही महंगाई को थामने के लिए आरबीआई 29 जनवरी को घोषित होने वाली मौद्रिक नीति में सख्त उठाएगा। मगर कृषि मंत्री शरद पवार की राय इससे जुदा है। उनका कहना है कि आवश्यक वस्तुओं के दामों में तेजी सीधे तौर से डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है। अगर वस्तुओं की सप्लाई बढ़ा दी जाए तो कीमतें स्वयं कम हो जाएंगी। इसके लिए जरूरी नहीं कि मौद्रिक नीति में सख्त कदम उठाकर ब्याजदर बढ़ाने का रास्ता साफ किया जाए। सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि सरकार चीनी की कीमत में नरमी लाने के लिए चीनी मिलों को आयातित चीनी को दूसरे मिलों को बेचने की अनुमति दे सकती है। इस बारे में जल्द अधिसूचना जारी की जा सकती है। इससे चीनी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बाजार में आ सकेगी। जब पत्रकारों ने कृषि मंत्री से यह पूछा कि क्या खाद्य उत्पादों में महंगाई को रोकने के लिए मौद्रिक उपाय करने की जरूरत है? उन्होंने कहा, इसकी जरूरत नहीं है। बेशक खाद्य उत्पादों की महंगाई दर 16 फीसदी पर जा पहुंची है, मगर जहां तक इसमें कमी आने की बात है तो, जैसे ही सप्लाई की स्थिति में सुधार आएगा, इसकी कीमतें कम होनी शुरू हो जाएंगी। कृषि मंत्री ने कहा कि स्थिति में सुधार आना शुरू हो गया है। उत्पादों की सप्लाई और उपलब्धता बढ़ रही है। आगे इसमें और सुधार होगा तो महंगाई पर नियंत्रण की प्रक्रिया स्वत: आरंभ हो जाएगी। गौरतलब है कि आरबीआई शुक्रवार को मौद्रिक नीति की अंतिम तिमाही की समीक्षा करने जा रहा है। कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बार आरबीआई कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं, जिनसे बाजार में मनी फ्लो कम हो। धन की उपलब्धता में कमी आए। इसके परिणामस्वरूप डिमांड घटे और बाजार शक्तियां कीमतें कम करने पर मजबूर हो जाएं। इधर, चीनी के थोक मूल्य में कमी आ रही है। मगर रिटेल में अभी इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। शरद पवार का कहना है, चीनी की रिटेल कीमत में भी जल्द कमी आनी शुरू हो जाएगी। चीनी का थोक मूल्य 4000 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 3500 रुपये पर आ गया है। (ई टी हिन्दी)
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