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20 जनवरी 2010
बारिश की कमी से दार्जिलिंग चाय का उत्पादन घटेगा
वर्ष 2009 के दौरान दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 15-18 फीसदी घटने का अनुमान है। इसकी वजह सीजन की शुरूआत में बहुत कम बारिश होना है। जर्मनी भारतीय दार्जिलिंग चाय के लिए सबसे बड़े बाजार के रूप में उबर रहा है। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के सचिव संदीप मुखर्जी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि दार्जिलिंग में वर्ष 2008 में करीब एक करोड़ किलो चाय का उत्पादन हुआ था। मौसम अनुकूल न रहने की वजह से वर्ष 2009 में उत्पादन 18 फीसदी तक घटने का अनुमान है। उनके मुताबिक पैदावार कम होने की वजह से इसके मूल्यों में पांच फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इन दिनों दार्जिलिंग चाय के नीलामी भाव 200 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं। मालूम हो कि दार्जिलिंग चाय प्रीमियम क्वालिटी की चाय है। इस वजह से 70-75 फीसदी दार्जिलिंग चाय निर्यात होती है। मुखर्जी का कहना है कि जर्मनी, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन दार्जिलिंग चाय के प्रमुख आयातक है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, रूस और चीन में भी इसकी मांग बढ़ रही है।बाकी 25-30 फीसदी की खपत घरेलू बाजार में होती है। दार्जिलिंग में चाय के करीब 87 बागान हैं। पैदावार में कमी का असर निर्यातकों पर पड़ा है। लेकिन दूसरे चाय उत्पाद देशों में भी पैदावार कम होने के चलते भारतीय निर्यातक अधिक मुनाफा कमा सकते थे। लेकिन देश में भी पैदावार कम होने से वे ऐसा नहीं कर पाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 के दौरान बारिश की कमी के दौरान चाय के उत्पादन में लगातार गिरावट आई थी। लेकिन पीक सीजन के दौरान उत्पादन सुधरने से चाय की कुल पैदावार में बहुत अधिक कमी नहीं आई। नीलामी केंद्रों पर चाय के दाम पिछले सीजन के मुकाबले 20 फीसदी तक ज्यादा हैं। जिससे चाय कंपनियों ने भी मूल्यों में 30-40 फीसदी का इजाफा किया है। भारतीय चाय बोर्ड के अनुसार बीते साल जनवरी- नवंबर के दौरान 92.02 करोड़ किलो चाय का उत्पादन हुआ है। (बिज़नस भास्कर)
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