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07 जनवरी 2010
आयातित खाद्य तेलों की तेजी से घरेलू बाजार में भी सुधार
आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले दस दिनों में करीब सात फीसदी की तेजी आ चुकी है। जिसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ना शुरू हो गया है। हालांकि इस समय त्योहारी सीजन के साथ ही ब्याह-शादियों का सीजन न होने से खाद्य तेलों में मांग भी कम है। वर्ष 2008-09 में भारत में खाद्य तेलों का रिकार्ड आयात हुआ, जिसके कारण घरेलू बाजार में उपलब्धता भी मांग के मुकाबले ज्यादा है। ऐसे में यह तेजी टिकने की संभावना नहीं है।दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि आयातित खाद्य तेलों के दाम बढ़ने का असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है। ब्याह-शादियों के साथ ही त्यौहारी सीजन न होने से खाद्य तेलों की मांग भी पहले की तुलना में कम हुई है जबकि रिकार्ड आयात होने से घरेलू बाजार में उपलब्धता भी बराबर बनी हुई है। लेकिन इसके बावजूद भी क्रूड पाम तेल के भाव मुंबई में बढ़कर 795 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) हो गए जबकि 23 दिसंबर को इसके भाव 745 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से आरबीडी पामोलीन के भाव बढ़कर 845 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) हो गए जबकि 23 दिसंबर को इसका भाव 785 डॉलर प्रति टन था। कारोबारी सूत्रों के मुताबिक मलेशिया व इंडोनेशिया में पाम बागानों का प्लांटेशन शुरू होने से उत्पादन गिरने से सप्लाई घटी है। इसी वजह से विदेशी भाव में सुधार आया।हेमंत गुप्ता ने बताया कि आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में आई तेजी के असर से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतें डेढ़ से दो रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी हैं। बुधवार को इंदौर में सोया रिफाइंड तेल के दाम बढ़कर 490 रुपये, हरियाणा में बिनौला तेल के दाम बढ़कर 417-418 रुपये, कांडला पर क्रूड पाम तेल के भाव 370-372 रुपये और मूंगफली तेल के दाम राजकोट में बढ़कर 680-685 रुपये प्रति दस किलो हो गए। हालांकि सरसों का स्टॉक उत्पादक मंडियों में ज्यादा होने से सरसों तेल के दाम इस दौरान 540 रुपये प्रति दस किलो के पूर्व स्तर पर ही टिके रहे। सरसों का स्टॉक उत्पादक मंडियों में करीब 12-13 लाख टन का बचा है जबकि फरवरी महीने में नई फसल आ जाएगी, इसलिए स्टॉकिस्टों की बिकवाली का दबाव बना है।साई सिरमन फूड लिमिटेड के डायरेक्टर नरेश गोयनका ने बताया कि घरेलू बाजार में मांग के मुकाबले खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा बनी हुई है इसलिए मौजूदा तेजी टिकने की संभावना नहीं है। साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार वर्ष 2008-09 तेल वर्ष में खाद्य तेलों का रिकार्ड आयात 81.8 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले साल 56.1 लाख टन का आयात हुआ था। आमतौर पर सर्दियों में खाद्य तेलों का आयात कम हो जाता है लेकिन नवंबर महीने में भी 7.12 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ जोकि पिछले साल नवंबर महीने के 5.19 लाख टन से ज्यादा है। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)
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