नई दिल्ली 01 10, 2010
जहाजरानी मंत्रालय मालभाड़े के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके लिए इस महीने के अंत में एक सलाहकार की नियुक्ति हो सकती है, जो नियामक प्राधिकरण, टैरिफ अथॉरिटी आफ मेजर पोट्र्स (टीएएमपी) द्वारा तय किए गए मालभाड़े के बारे में दिशा निर्देश बदलेगा।
देश के 12 सरकारी बंदरगाहों में मालभाड़े यह प्राधिकरण ही तय करता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'वर्तमान प्रावधान की समय सीमा इस साल मार्च के अंत तक समाप्त हो जाएगी। दिशानिर्देशों में बदलाव और उन पर पुनर्विचार में कुछ समय लगेगा। मंत्रालय इस पर विचार कर रहा है कि वर्तमान दिशानिर्देशों की अवधि पूरी होने के पहले पुनरीक्षित नियमावली तैयार कर ली जाए।'
सलाहकार की सिफारिशों को कारोबारी संस्थाओं और बंदरगाह के अधिकारियों के सामने बहस के लिए रखा जाएगा। उम्मीद है कि पुनरीक्षित दिशानिर्देश अगले वित्त वर्ष (2010-11) के पहले महीने अप्रैल से लागू हो जाएंगे। सुधार के बाद लागू दिशानिर्देश अगले 5 साल यानी 2015 तक प्रभावी रहेंगे।
वर्तमान में निजी क्षेत्र भी बड़े बंदरगाहों के टर्मिनलों का संचालन कर रहे हैं, जिनकी कुल राजस्व में हिस्सेदारी 30-40 प्रतिशत है। अधिकारी ने कहा कि बंदरगाहों के बेहतर ढंग से संचालन के लिए राजस्व हिस्सेदारी में बदलाव पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही मंत्रालय मेजर पोर्ट रेगुलेटरी अथॉरिटी एक्ट 2009 पर भी काम कर रहा है।
यह वर्तमान में लागू मेजर पोर्ट ट्रस्ट एक्ट 1963 की जगह लेगा। इस अधिनियम में शुल्क नियामक (टैरिफ रेगुलेटर) कार्यप्रणाली को व्यापक बनाने के साथ ही उसे उन बंदरगाहों के अधिकारियों और निजी ऑपरेटरों को दंडित करने के अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, जो मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
साथ ही 200 छोटे बंदरगाहों के स्तर में भी सुधार की व्यवस्था पर भी नए अधिनियम में विचार किया जा रहा है। इस समय इन 200 छोटे बंदरगाहों का संचालन करने वाले राज्यों और निजी कारोबारियों को नियामक से स्वायत्तता मिली हुई है, जिसमें उनके बंदरगाहों का किराया तय करने का अधिकार भी शामिल है।
नए अधिनियम से न केवल टैरिफ अथॉरिटी फार मेजर पोर्ट्स (टीएएमपी) को इन बंदरगाहों की दरों को तय करने का अधिकार मिलेगा, बल्कि नियामक उन बंदरगाहों के मानकों और गुणवत्ता पर भी नजर रखेगा।
टीएएमपी वास्तविक प्रदर्शन और उपलब्ध कराई जा रही सेवा के स्तर पर भी ध्यान रखेगा। इसे तय किए गए मानकों के आधार पर आंका जाएगा। मानकों को पूरा न करने वालों को दंडित करने का प्रावधान होगा।
सुधार की उम्मीद
इस महीने के अंत तक नियुक्त हो सकता है सलाहकारसलाहकार की सिफारिशों के मुताबिक तय होंगे पुनरीक्षित दिशानिर्देश, जिनमें मालभाड़ा, बंदरगाहों के संचालन आदि के नियम(बीएस हिन्दी)
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