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25 जनवरी 2010
चीनी पर हर मंतर नाकाम, उपायों के बावजूद बढ़ रहे दाम
नई दिल्ली।। चीनी की कुलांचे भरती कीमतों को काबू करने के लिए केंद सरकार के उपायों की घोषणा के 10 दिन बाद भी हालात नहीं बदले हैं। इसके खुदरा दामों में कमी आने की उम्मीदों के ठीक उलट दिल्ली और भुवनेश्वर बाजारों को छोड़कर देशभर में इसकी कीमत 10 रुपये प्रति किलोग्राम और बढ़ गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ये आंकड़े ग्राहकों का दिल दुखाने के साथ सरकार की 'कोशिशों' की हवा भी निकाल रहे हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख बाजारों में 13 जनवरी से चीनी की थोक कीमतों में कुछ कमी जरूर आई है, जब सरकार ने खुदरा दामों के 50 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छूने पर इसकी रफ्तार थामने के लिए कई उपायों का एलान किया था। खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार ने दस दिन पहले चीनी की कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए कई कदमों की घोषणा की थी और साथ ही कहा था कि इन उपायों का असर कम खुदरा मोर्चे पर कम से कम 10 से 15 दिन में दिखेगा। पवार ने उपायों की घोषणा करते हुए कहा था, 'रीटेल बाजारों में इनका असर दिखने के लिए 10-15 दिन का वक्त लगेगा।' मांग-आपूर्ति में भारी अंतर को देखते हुए सरकार ने आयात की गई कच्ची चीनी की प्रोसेसिंग देशभर में भी कहीं भी करने की इजाजत दी थी। साथ ही उसने कच्ची चीनी के शून्य-ड्यूटी आयात की मियाद भी दिसंबर अंत तक बढ़ाने का फैसला किया। यह अवधि मार्च में खत्म होने जा रही थी। इन उपायों के बाद थोक मूल्यों पर कुछ प्रभाव दिखा और दिल्ली में इसके दाम 3।50 रुपये प्रति किलोग्राम लुढ़ककर 41 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गए, जबकि मुंबई में इनमें एक रुपये से भी कम गिरावट आई। दिल्ली और भुवनेश्वर को छोड़कर अन्य जगहों पर रीटेल कीमतें बीते नौ दिन में 10 रुपये प्रति किलोग्राम उछल गई हैं और उम्मीद के मुताबिक इनमें कोई गिरावट नहीं आई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों बाजारों में खुदरा दाम 2-3 रुपये कमी के साथ क्रमश: 44 रुपये प्रति किलोग्राम और 42 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं। आइजल में रीटेल कीमतें 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 35 रुपये पर पहुंच गई हैं। इसी तरह अहमदाबाद में रीटेल दाम 4 रुपए उछलकर 44 रुपये प्रति किलोग्राम पर हैं, जबकि पटना और बंगलुरु में 1-2 रुपये बढ़कर क्रमश: 42 रुपए और 40 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत मौजूदा सीजन में सितंबर 2010 तक 1.6 करोड़ टन चीनी का उत्पादन करने में कामयाब रहेगा, जबकि मांग 2.3 करोड़ टन की है। इस अंतर को आयात के जरिए पाटा जाएगा। (बीएस हिन्दी)
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