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08 जनवरी 2010
चीनी की कीमतों पर प्रधानमंत्री बेचैन
पचास रुपये किलो की ओर बढ़ रही चीनी की कीमतों में आम आदमी तो पिस ही रहा है, अब इसके चलते कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच कड़वाहट चरम पर जा सकती है। गुरुवार को कीमतों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपी) की बैठक में जो हुआ वह कुछ इसी तरह का संकेत दे रहा है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने इस बैठक में खाद्य मंत्रालय पर चीनी की कीमतें नियंत्रित करने में लगभग नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए सप्ताह भर में कीमतों को काबू में करने का फरमान सुना दिया। उन्होंने इस बात के भी संकेत दे दिए कि अगर हफ्ते भर बाद भी हालात नहीं सुधरे तो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय मोर्चा संभालेगा। इस बैठक में खाद्य और कृषि मंत्री शरद पवार मौजूद थे। सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में प्रधानमंत्री खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्रालय से काफी नाखुश दिखे। उन्होंने इस नाखुशी को जाहिर करने में संकोच भी नहीं किया। केवल खाद्य मंत्रालय ही नहीं कृषि मंत्रालय भी शरद पवार के ही पास है। इसके चलते अब कांग्रेस इस कीमत बढ़ोतरी में कुछ षडयंत्र सूंघ रही जो दूरगामी रूप में कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकता है। बुधवार को भी एक बैठक में इस मुद्दे को काफी गंभीरता से लिया गया था। उस बैठक में भी प्रधानमंत्री मौजूद थे।वहीं वित्त मंत्रालय के अधिकारी आशंका जाहिर कर रहे हैं कि चीनी के दाम अगर इसी तरह बढ़ते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब यह 60 रुपये किलो के स्तर को छू जाएगी।चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले करीब एक पखवाड़े में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमतें 800 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गई हैं। उत्तरी राज्यों की चीनी मिलों में 16 दिसंबर, 2009 को चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3300 रुपये प्रति क्विंटल थी जो 7 जनवरी तक 1000 रुपये बढ़कर 4300 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। दिल्ली थोक बाजार में इस दौरान चीनी की कीमतें 3450 रुपये से 4400 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई हैं। अगर यही हालात रहे तो थोक बाजार में 44 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी चीनी की कीमतों के रिटेल में 50 रुपये तक पहुंचने में बहुत अधिक समय नहीं लगेगा।दिलचस्प बात यह है कि इस समय देश में चीनी की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद खाद्य मंत्रालय ने चीनी का खुले बाजार में कोटा कम जारी किया है। यही नहीं आयातित चीनी और आयात के सौदों के साथ चालू सीजन का उत्पादन और पिछले सीजन का बकाया स्टॉक जोड़ने पर चालू सीजन में चीनी की देश में उपलब्धता 230 लाख टन पर चली जाती है जो देश की करीब 220 लाख टन की खपत से अधिक है।ऐसे में अब कांग्रेस को साफ दिख रहा है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उसे इसका राजनीतिक खमियाजा भुगतना पड़ेगा। वहीं जिस तरह इस भारी तेजी पर शरद पवार और उनके नियंत्रण वाले खाद्य मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है उसे कांग्रेस अपने खिलाफ माहौल बिगाड़ने की मुहिम से रूप में भी देख रही है। यही वजह है कि अक्सर शांत रहने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के गुरुवार की सीसीपी बैठक में तेवर काफी तीखे थे।बिफरे मनमोहनप्रधानमंत्री ने खाद्य मंत्रालय पर चीनी की कीमतें नियंत्रित करने में लगभग नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए सप्ताह भर में कीमतों को काबू में करने का फरमान सुनाया। इस बात के भी संकेत दिए कि अगर हफ्ते भर बाद भी हालात नहीं सुधरे तो सीधे पीएमओ मोर्चा संभालेगा। क्यों हुए खफाकांग्रेस को साफ दिख रहा है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उसे इसका राजनीतिक खमियाजा भुगतना पड़ेगा। जिस तरह कीमतों में तेजी पर शरद पवार और उनके नियंत्रण वाले खाद्य मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है उसे कांग्रेस अपने खिलाफ माहौल बिगाड़ने की मुहिम के रूप में भी देख रही है। (बिसनेस भास्कर)
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