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01 दिसंबर 2009
दिसंबर के लिए प्याज का निर्यात मूल्य बढ़ाया
सरकार को प्याज के मूल्य में अब और ज्यादा तेजी आने की ज्यादा संभावना नहीं दिखाई दे रही है। यही वजह है कि प्याज भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) ने दिसंबर माह के लिए प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) सिर्फ पांच डॉलर बढ़ाकर 450-455 डॉलर प्रति टन कर दिया है। घरेलू बाजार में प्याज के दाम नियंत्रण में रहने और नई फसल की सप्लाई शुरू होने के कारण ही एमईपी में मामूली वृद्धि की गई है। नेफेड के एक अधिकारी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि नवंबर माह के दौरान प्याज का निर्यात सीमित रहने के कारण इसका एमईपी कम बढ़ाया गया है। अधिकारी के मुताबिक 25 नवंबर करीब 40 हजार टन प्याज का निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल नवंबर के दौरान 1।07 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था। घरेलू बाजार में प्याज के दाम घटने और पहले से एमईपी अधिक होने की वजह से भी इसमें ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई। नवंबर की शुरूआत में देश में प्याज के दाम 1800-2100 रुपये प्रति क्विंटल थे जो अब घटकर 1500-1600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। अक्टूबर माह के शुरूआत में प्याज के दाम अचानक दोगुने बढ़ने के कारण एमईपी 85 डॉलर बढ़ाकर 300 डॉलर प्रति टन कर दिया गया था। इसके बाद नवंबर की शुरूआत में भी प्याज की कीमतों में तेजी रहने के कारण नवंबर माह के लिए प्याज का एमईपी 145 डॉलर प्रति टन बढ़ाया गया था। इसे बढ़ाने का मकसद प्याज के निर्यात को नियंत्रण में करना था। दरअसल अक्टूबर के लिए एमईपी बढ़ने के बावजूद प्याज का निर्यात बढ़ा था। सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में प्याज का निर्यात 20 फीसदी बढ़कर 1.23 लाख टन हो गया था। चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक करीब 11.20 लाख टन प्याज का निर्यात हो गया। जो पिछली समान अवधि के मुकाबले करीब दस फीसदी अधिक है। वित्त वर्ष 2008-09 में भारत से प्याज का निर्यात करीब 51 फीसदी बढ़कर 16.70 लाख टन हो गया था। प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में सितंबर माह के अंत में भारी बारिश होने के कारण 15-25 फीसदी प्याज की फसल को नुकसान होने की आशंका हैं। आंध्र प्रदेश में 25 फीसदी, कर्नाटक में 35 फीसदी प्याज की फसल खराब हो गई है। हालांकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्याज का अधिक उत्पादन होने की संभावना है। देश के कई हिस्सों में प्याज की फसल को नुकसान होने के कारण ही इसके दाम अधिक हैं। (बिज़नस भास्कर)
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