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01 दिसंबर 2009
पंजाब और हरियाणा की मंडियों में कपास की सप्लाई धीमी पड़ी
पंजाब और हरियाणा की मंडियांे में कपास की आवक और घट गई है। सप्लाई घटने लेकिन मांग मजबूत बनी रहने से पिछले 10 दिनों में कपास के भाव करीब 400 रुपये प्रति `िंटल तेज हो गए। आगे भाव और बढ़ने की उम्मीद में किसान कपास की बिक्री से बच रहे हैं। अनुमान है कि इन राज्यों मंे अब तक सिर्फ 30 फीसदी कपास बिक्री के लिए मंडियों में लाई गई। जबकि पिछले साल समान अवधि में तकरीबन 45 फीसदी कपास की मंडियों में सप्लाई हो गई थी। दस दिन पहले तक 2800 से 3000 रुपये प्रति क्ंिवटल के भाव पर बिकने वाली कपास मंडियांे मंे 3200 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक 21 नवम्बर तक पंजाब की मंडियांे मंे 5।म्क् लाख गांठ (एक गांठ मंे 170 किलो) और हरियाणा की मंडियांे मंे 4.त्तम् लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है। पिछले साल समान अवधि मंे पंजाब में 7.8क् लाख और हरियाणा में 4.8म् लाख गांठ की आवक मंडियों मंे हो गई थी। बठिंडा मंे कपास के एक बड़े व्यापारी और पंजाब जिनर्स मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान बंसल का कहना है कि पंजाब और हरियाणा की मंडियांे मंे 10 दिन पहले तक प्रतिदिन 12 से 13 हजार गांठ कपास की आवक हो रही थी लेकिन अब घटकर 8 से 10 हजार गांठ रह गई है। हरियाणा के हिसार जिला के गांव मड़ के किसान कृष्ण कक्कड़ का कहना है कि वह अभी अपनी तकरीबन 200 क्विंवटल कपास बेचने का इच्छुक नहीं है। वह अपनी फसल तब बेचेगा जब भाव 4000 रुपये प्रति `िंटल से अधिक होगा। कक्कड़ का कहना है कि पहली बार किसान फसल से समय अपना माल निकालने के इच्छुक नहीं हैं।मानसा में कपास व्यापारी पवन जिंदल का कहना है कि कपास का बुवाई रकबा बढ़ने के बावजूद इस साल पंजाब व हरियाणा में सूखे के चलते उत्पादन घटने के आसार हैं। इसके अलावा विश्व बाजार मंे यार्न के महंगे होने से यहां कपास के दाम बढ़ रहे हैं। भारत से कपास की निर्यात मांग बढ़ रही है। सीसीआई के अनुसार पंजाब में इस साल 5.ब्स्त्र लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी। यहां 16 लाख गांठ कपास का उत्पादन होने का अनुमान है। जबकि पिछले साल 5.फ्त्त लाख हैक्टेयर में 17.म्क् लाख गांठ उत्पादन हुआ था। वहीं हरियाणा मंे पिछले साल 4.म्स्त्र लाख हैक्टेयर रकबा रहा था। इस साल यह बढ़कर 5.फ्फ् लाख हैक्टेयर हो गया। व उत्पादन 14 लाख गांठ से घटकर 13 लाख टन रहने के आसार हैं। (बिज़नस भास्कर)
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