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04 दिसंबर 2009
कॉपर के दाम 14 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचे
वैश्विक आर्थिक हालात सुधरने से कॉपर की मांग बढ़ने की संभावना में इसके दाम 14 माह के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। जानकारों के मुताबिक चीन, अमेरिका, भारत सहित अन्य देशों में कॉपर की औद्योगिक मांग बढने लगी हैं। इस वजह से कॉपर की कीमतों में तेजी को बल मिला हैं। हालांकि मुनाफावसूली के चलते इसके मूल्यों में हल्की गिरावट आ सकती हैं।बुधवार को लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) कॉपर तीन माह डिलीवरी के दाम बढ़कर 7065 डॉलर प्रति टन और शंघाई फ्यूचर एक्सचेंज में 55,310 युआन प्रति टन के स्तर पर पहुंच गए। घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कॉपर फरवरी वायदा के दाम 0।71 फीसदी बढ़कर 331.10 रुपये प्रति किलो हो गए। जबकि हाजिर में भाव330 रुपये प्रति किलो रहे। पिछले चार-पांच माह के दौरान कॉपर के दाम 50 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।कॉपर कारोबारी सुरेश चंद गुप्ता ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधारों की वजह से कॉपर की औद्योगिक मांग और बढ़ने की संभावना है।इस वजह से कॉपर की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ हैं। एंजिल ब्रोकिंग के विश्लेषक अनुज गुप्ता का कहना है कि चीन, अमेरिका में इक्विटी मार्केट सुधरने से कॉपर की औद्योगिक मांग और सुधरने की संभावना हैं। सथ ही भारत में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी बढ़ने से देश में आगे कॉपर की मांग अधिक रहने के आसार हैं। जानकारों के मुताबिक डॉलर की गिरावट के कारण भी कॉपर के दाम बढ़े हैं। उनके मुताबिक आगे मुनाफावसूली के चलते इसके मूल्यों में गिरावट आ सकती है, लेकिन मांग अच्छी रहने की वजह से दाम बहुत अधिक नहीं घटेंगे। इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप (आईसीएसजी) के मुताबिक अगले साल प्रमुख कॉपर की ज्यादा खपत वाले देशों में इसकी मांग अधिक रहने की संभावना है। चीन में अगले साल कॉपर की खपत आठ फीसदी बढ़कर 58.3 लाख टन तक पहुंच सकती हैं।रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 के दौरान कॉपर कावैश्विक खनन उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़कर 169 लाख टन हो सकता हैं। इस दौरान रिफाइंड कॉपर का उत्पादन करीब एक फीसदी बढ़कर 182 लाख टन होने की संभावना हैं। उल्लेखनीय है कि कॉपर की सबसे अधिक खपत इलैक्ट्रिकल में 42 फीसदी, भवन निर्माण में 28 फीसदी, ट्रांसपोर्ट में 12 फीसदी, कंज्यूमर प्रोडक्ट में 9 फीसदी और इंडस्ट्रियल मशीनरी में 9 फीसदी होती है। इसका सबसे अधिक उत्पादन एशिया में 43 फीसदी होता है। इसके बाद 32 फीसदी अमेरिका,19 फीसदी यूरोप में किया जाता है। (बिज़नस भास्कर)
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