नई दिल्ली. गन्ना मूल्य प्रणाली में फेरबदल करने वाले गन्ना नियंत्नण संशोधन अध्यादेश को वापस लेने की मांग पर संसद में लगातार दूसरे दिन आज भी विपक्ष की नारेबाजी और जबरदस्त हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा और राज्यसभा में सुबह कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और वामदलों सहित समूचे विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष/सभापति के आसनों के समक्ष उतर कर अध्यादेश को तुरंत वापस लेने और गन्ना मूल्य प्रणाली में बदलाव करने की मांग को लेकर जबरदस्त नारेबाजी की।
विपक्षी सदस्यों को शांत करने की कई कोशिशों और दो तीन बार के संक्षिप्त स्थगन के बावजूद जब स्थिति काबू में आने की उम्मीद नहीं देख कर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अन्सारी ने अपने अपने सदनों की कार्यवाही सोमवार २३ नवंबर तक के लिये स्थगित कर दी।
लोकसभा में ११ बजे प्रश्नकाल शुरू होते ही सपा के सदस्य सीधे नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए। उन्होंने गन्ने के दाम बढ़ाने और इस संबंध में जारी अध्यादेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। भाजपा के सदस्यों ने भी इस मांग का समर्थन किया। अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने को कहा लेकिन उन्होंने उनकी बात को अनसुना कर दिया। करीब करीब समूचे विपक्ष की नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही शुरु होने के बमुश्किल सात-आठ मिनट बाद ही १२ बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राहुल का गन्ना आंदोलन में हस्तक्षेप पूर्व नियोजित कदम : अजित
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के गन्ना किसान आंदोलन में हस्तक्षेप करने को राजनीतिक लाभ उठाने का पूर्व नियोजित कदम बताते हुए कहा कि रालोद के आंदोलन से सरकार पर दबाव बढा है। सिंह ने गन्ना अध्यादेश तत्काल वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि उनकी पार्टी के साथ अन्य राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने जो व्यापक गन्ना किसान आंदोलन चलाया है उससे केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों ही दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि आगामी सोमवार को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में वह किसानों की समस्याओं को और जोर शोर से उठायेंगे और उन्हें हल करने की सलाह भी सरकार को देंगे। हालांकि अभी तक उन्हें बैठक की कोई जानकारी प्रधानमंत्नी की ओर से नहीं मिली है। (दैनिक भासकर)
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