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06 नवंबर 2009
बासमती में मध्य-पूर्व देशों के आयातकों ने दिखाई गहरी रुचि
भारतीय बासमती चावल खरीदने के लिए मध्य-पूर्व के कई देशों के आयातकों से निर्यातकों को कारोबारी पूछताछ मिल रही है। इन देशों के साथ नए सौदे भी हो रहे हैं। ये सौदे 800 से 1000 डॉलर प्रति टन के भाव पर हो रहे हैं।सऊदी अरब के आयातकों के साथ 900 से 1,000 डॉलर प्रति टन पर करीब 30,000 टन चावल का सौदा किया गया है। वहीं यूरोप ने 50,000 टन भूरा बासमती खरीदने के लिए 800-850 डॉलर प्रति टन में सौदा किया है। बासमती निर्यातक टिल्डा राइसलैंड के निदेशक आर.एस. शेषाद्री ने कहा कि पूसा-1121 बासमती चावल भारी छूट पर पिछले वर्ष के स्तर पर बेचा जा रहा है। घरेलू बाजार में पूसा 1121 धान के भाव गिरकर 1,600 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं जबकि गत वर्ष इसके भाव 2,800 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल थे।एक अन्य निर्यातक केआरबीएल लिमिटेड के चेयमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल मित्तल ने कहा कि पिछले वर्ष के शीर्ष स्तर से इसके भावों में अब तक 500 से 600 डॉलर प्रति टन तक की गिरावट आ चुकी है और इसमें आगे और गिरावट आ सकती है। उधर ईरानी प्रशासन ने भारतीय बासमती चावल की गुणवत्ता को लेकर भले ही हरी झंडी दे दी है, लेकिन निर्यातकों का दावा है कि ईरान को चावल निर्यात के लिए वे कम दामों पर बातचीत कर रहे हैं। ईरान के खरीददार पिछले सौदों की सप्लाई 400 डॉलर प्रति टन कम यानि 900 से 1,000 डॉलर प्रति टन पर चाहते हैं।भारतीय निर्यातक ईरानी खरीदारों के साथ बातचीत कर रहे हैं। पिछले माह भारतीय बासमती चावल में हानिकारक तत्वों की मात्रा काफी ज्यादा होने की खबरें आई थी। लेकिन ईरानी प्रशासन ने भारतीय बासमती को मानव उपभोग के योग्य करार देकर इस परेशानी को दूर कर दिया था। लेकिन निर्यातकों की मानें तो कीमत को लेकर विवाद अभी बना हुआ है।कोहिनूर फूड लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरनाम अरोड़ा ने कहा कि पिछले 8-10 दिन में ईरान को 20,000 टन चावल निर्यात किया गया है। ताजा सौदा चालू खरीफ के चावल का है। (बिज़नस भास्कर)
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