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14 नवंबर 2009
रबी में भी तिलहन बुवाई की शुरूआती तस्वीर निराशाजनक
चालू रबी सीजन में तिलहनों की बुवाई पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक देश में रबी फसल की तिलहनों सरसों, मूंगफली और सूरजमुखी की बुवाई 54।91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 61.31 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इस दौरान मोटे अनाजों की बुवाई में भी 5.63 लाख हैक्टेयर की कमी आई है।प्रतिकूल मौसम से खरीफ सीजन में तिलहनों की पैदावार में कमी की भरपाई सरकार रबी में करना चाहती है। लेकिन कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी सीजन में तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई मात्र 42.13 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 47.76 लाख हैक्टेयर की बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से सूरजमुखी की बुवाई भी मात्र 4.26 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.40 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी मूंगफली की बुवाई अभी तक 1.81 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.28 लाख हैक्टेयर में हुई थी। तिलहन की पैदावार में खरीफ सीजन भी कोई अच्छा नहीं रहा। कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के मुताबिक खरीफ में तिलहनों का उत्पादन 152.3 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2008-09 में 178.8 लाख टन का उत्पादन हुआ था। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई भी पिछले साल के 43.09 लाख हैक्टेयर के मुकाबले घटकर 37.61 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।रबी सीजन की मक्का की बुवाई 1.96 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। जौ की बुवाई 2.29 लाख हैक्टेयर के मुकाबले थोड़ी बढ़कर 2.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। लेकिन रबी में गेहूं की बुवाई अभी तक 56.76 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 54.03 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है। रबी सीजन के धान की रोपाई अभी तक सिर्फ 58 हजार हैक्टेयर में हुई है। यह पिछले साल की समान अवधि के 13 हजार हैक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ में दलहन की बुवाई 102.80 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल के 96.60 लाख हैक्टेयर के मुकाबले ज्यादा है। इसमें अरहर की बुवाई 34.69 से बढ़कर 36.22 लाख हैक्टेयर में, उड़द की 21.09 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 22.65 लाख हैक्टेयर में तथा मूंग की बुवाई 22.41 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 24.20 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। (बिज़नस भास्कर)
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