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17 नवंबर 2009
निर्यातकों की खरीद से कपास के भाव ऊपर
चीन में पैदावार कम होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोरदार मांग निकलने से मौजूदा सीजन में कपास के दाम पिछले साल से ऊपर चल रहे हैं। देश में कपास का उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद निर्यातकों की खरीद मजबूत बनी हुई है। खुले बाजार में भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा होने के कारण कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीआईआई) ने अभी तक मध्य प्रदेश में खरीद शुरू नहीं की है लेकिन उसने खरीद के लिए तैयारियां कर ली हैं।पिछले साल खुले बाजार में कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे रहने के कारण कॉटन कॉरपोरशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने ख्म् अक्टूबर से कपास की खरीद शुरू कर दी थी। बेहतर दाम पाने के लिए किसानों ने सीसीआई को ही एमएसपी पर कपास बेची थी। लेकिन इस साल हालात एकदम बदले हुए हैं। खुले बाजार में भाव एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं। मध्य प्रदेश की मुख्य कपास मंडी सेंधवा में दाम फ्त्तक्क् रुपये प्रति क्विंटल से नीचे नहीं गए। जबकि ऊपर में ब्क्क्क् रुपये प्रति क्विंटल तक कपास बिक गई। फिलहाल कपास के दाम फ्8क्क्-ब्क्क्क् रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बने हुए है। सेंधवा में कपास उत्पादक विजय सिंह ने बिजनेस भास्कर को बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी सारी कपास एमएसपी पर बेची थी। किंतु इस बार निर्यातकों की खरीद काफी अच्छी है। जिससे खुले बाजार में ही कपास के बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसके अलावा जिनिंग मिलों ने भी खरीद तेज कर दी है। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए कपास का एमएसपी पूर्ववत फ्म्क्क् से ब्क्क्क् रुपये प्रति क्विंटल के बीच रखा है। दूसरी ओर रुई यानि कॉटन के दाम फ्म्क्क्क् रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) तक पहुंच गए हैं। जबकि पिछले साल रुई के दाम इसी अवधि में फ्ख्000-फ्फ्क्क्क् रुपये प्रति कैंडी थे। मध्य प्रदेश में म्।8त्त लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है। पहले करीब ख्म् लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कपास का उत्पादन होने का अनुमान था। लेकिन अब उत्पादन ख्9-फ्क् लाख गांठ तक पहुंचने की संभावना है। कॉटन कॉरपोरशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने अभी तक खरीद शुरू नहीं की है लेकिन उसने खरीद के लिए तैयारी पूरी कर ली है। सीसीआई के सहायक महाप्रबंधक अतुल काला ने बिजनेस भास्कर को बताया कि सीसीआई ने प्रदेश भर में ख्त्त खरीद केंद्र बनाये है। यदि कहीं भी दाम एमएसपी से नीचे जाते है तो वहां खरीद कर ली जाएगी। इसके अलावा सीसीआई ने प्रदेश की मिलों के साथ समझौता प्रक्रिया शुरू कर दी है। जहां पर सीसीआई की खरीदी कपास की जिनिंग और प्रेसिंग की जाएगी। काला ने बताया कि 9त्त मिलों ने सीसीआई के कपास की प्रोसेसिंग के लिए सहमति दे दी है। (बिज़नस भास्कर)
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