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17 नवंबर 2009
खुले बाजार से महंगा सरकारी गेहूं
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गेहूं का दाम ऊंचा होने के कारण फ्लोर मिलें नवंबर के टेंडर भरने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। एफसीआई द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं बेचने के लिए मांगी गई निविदा का नवंबर के लिए दिल्ली में रिजर्व मूल्य 1420.94 रुपये, पंजाब और हरियाणा के लिए 1406.75 रुपये, मध्य प्रदेश के लिए 1477.47 रुपये और छत्तीसगढ़ के लिए 1531.61 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मिलों को इससे ऊंचे भाव पर टेंडर भरना होगा। लेकिन इन राज्यों के खुले बाजार में गेहूं का दाम सरकारी भाव से 30-40 रुपये प्रति क्विंटल नीचे चल रहे हैं। इन भावों पर राज्य का टैक्स अलग से लगेगा। दिल्ली के एक फ्लोर मिलर ने बताया एफसीआई के गेहूं का दाम 1420.94 रुपये प्रति क्विंटल है। इसमें 25-30 रुपये प्रति क्विंटल का खर्चा अलग से लगेगा। ऐसे में सरकारी गेहूं मिलों में पहुंच 1450-1455 रुपये प्रति क्विंटल बैठेगा। जबकि खुले बाजार में मिलों को 1420-1425 रुपये प्रति क्विंटल (मिल पहुंच) मिल रहा है। इसीलिए मिलें नवंबर में निविदा भरने में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। लुधियाना स्थित मैसर्स गिल फ्लोर मिल के डायरेक्टर धर्मेंद्र गिल ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में एफसीआई ने 1406.75 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया है। इसमें लोकल परिवहन लागत और वैट मिलाकर करीब 70-80 रुपये का खर्चा जोड़ने पर मिल पहुंच दाम 1485-1490 रुपये प्रति क्विंटल होगा। जबकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश से मिल पहुंच गेहूं का भाव 1460-1470 रुपये प्रति क्विंटल है। इसलिए मिलों द्वारा नवंबर महीने के लिए निविदा भरने के आसार कम हैं। केंद्र सरकार ने पांच लाख टन गेहूं अक्टूबर से दिसंबर तक ओएमएसएस के तहत बेचने का फैसला लिया था। लेकिन एफसीआई द्वारा भाव तय करने में देरी के कारण अक्टूबर में गेहूं का उठान ही नहीं हो सका। केंद्रीय पूल में एक अक्टूबर को गेहूं का 284.57 लाख टन का भंडार मौजूद था जोकि बफर स्टॉक से काफी ज्यादा है। पहली अक्टूबर को बफर स्टॉक के तहत 110 लाख टन गेहूं का भंडार होना चाहिए। वर्ष 2008-09 में देश में गेहूं का रिकार्ड 805 लाख टन का उत्पादन हुआ था जबकि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1080 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 252 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। फसल के समय से अब तक गेहूं की कीमतों में 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। (बिज़नस भास्कर.....आर अस राणा)
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