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23 नवंबर 2009
सीसीआई की कपास खरीद 77 फीसदी घटी
मुंबई.कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) अब तक सिर्फ 2.20 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कपास की खरीद कर पाई है। एक अक्टूबर से शुरू हुए नए सीजन में इस साल कपास की सरकारी खरीद पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 77 फीसदी कम है।सीसीआई के अधिकारी के अनुसार इस साल खुले बाजार में दाम सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर होने के कारण सीसीआई की खरीद कमजोर है। सरकार ने इस साल एमएसपी में कोई बदलाव नहीं किया था। पिछले साल एमएसपी काफी ज्यादा बढ़ाए जाने के बाद खुले बाजार में भाव काफी कम रहे थे। इस समय कपास का एमएसपी ग्रेड के अनुसार 2,500 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। इस अधिकारी ने बताया कि आंध्र प्रदेश और पंजाब में सीसीआई द्वारा कपास की खरीद की गई। लेकिन महाराष्ट्र में खरीद नाममात्र के लिए ही रही। सीसीआई ने पिछले सीजन वर्ष 2008-09 के दौरान कुल 89 लाख गांठ कपास की खरीद की थी। उसने 1.25 लाख गांठ कपास की बिक्री भी कर दी।भारत कपास के उत्पादन में विश्व में दूसरा सबसे बड़ा देश है। इस साल उत्पादन गिरकर 295 लाख गांठ रहने का अनुमान है जबकि पहले 305 लाख गांठ कपास की संभावना व्यक्त की गई थी। इस साल खरीफ सीजन के दौरान मानसून में काफी देरी और अक्टूबर के दौरान कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आने से कपास की उत्पादकता कम रहने का अनुमान है। कपास की पैदावार में कमी आने की संभावना से ही बाजार में भाव ऊंचे चल रहे हैं। इससे परेशान टैक्सटाइल उद्योग कॉटन (रुई) का निर्यात रोकने की मांग कर रहा है। सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टैक्सटाइल इंडस्ट्री ने इस संबंध में सरकार को ज्ञापन दिया है। उद्योग का कहना है कि पहले घरेलू मांग पूरी की जानी चाहिए। वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कॉटन के निर्यात पर रोक के लिए विचार किए जाने का संकेत दिया है। हालांकि कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने संभावित निर्यात प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा है कि देश में कॉटन की सुलभता पर्याप्त होगी। (बिज़नस भास्कर)
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