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04 नवंबर 2009
20 लाख टन चावल आयात पर सरकार कर रही है विचार
इस साल खरीफ सीजन में घरेलू धान उत्पादन गिरने की संभावना बढ़ने के बाद सरकार 20 लाख टन चावल आयात करने पर विचार कर रही है ताकि घरेलू बाजार में चावल की सुलभता बढ़ाई जा सके। दुनिया के प्रमुख चावल उत्पादक देश भारत में इस वर्ष चावल उत्पादन पर पड़ी सूखे एवं बाढ़ की दोहरी मार के कारण ही आयात की नौबत आई है।सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार चावल आयात को सुनिश्चित करने के लिए कुछ प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर रही है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने पिछले माह चावल पर 70 फीसदी आयात शुल्क हटा दिया था।सूत्रों के मुताबिक भारत सरकारी स्तर पर थाईलैंड और वियतनाम से चावल आयात के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अगले एक साल के दौरान चावल का आयात किया जाएगा। खाद्य वस्तुओं पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह की बैठक 12 नवंबर को होनी है। इसी बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा।सार्वजनिक क्षेत्र की ट्रेडिंग फर्म एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी दिसंबर माह तक 30 हजार टन चावल का आयात करने के सरकारी निर्देश पर पहले ही निविदाएं आमंत्रित कर चुकी हैं। घरेलू बाजार में चावल की सुलभता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे पहले प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि सूखे और बाढ़ के चलते इस साल चावल उत्पादन 1.6 करोड़ टन कम रहने की आशंका है। भारत में वर्ष 2008-09 के दौरान 9.91 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। गौरतलब है कि पिछले दो वित्त वष्रो के दौरान देश में चावल की बंपर पैदावार हुई थी। वहीं, इस साल हालात बदल गए हैं और केंद्र सरकार को चावल आयात के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सार्वजनिक उपक्रमों के अलावा निजी व्यापारियों ने भी थाईलैंड जैसे देशों से चावल का आयात करना शुरू कर दिया है। (बिज़नस भास्कर)
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