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12 अक्टूबर 2009
सूखे और बाढ़ से देश की खाद्य सुरक्षा पड़ी संकट में
इसे जलवायु परिवर्तन का असर कहें या कुछ और लेकिन तीन महीनों के अंदर ही पहले सूखे और अब बाढ़ की मार ने देश की खाद्यान्न सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। जानकारों का कहना है कि इस दोतरफा कुदरती कहर से देश के अनाज भंडार में भारी कमी आ सकती है। पहले उत्तर भारत में सूखे की मार और अब दक्षिण में बाढ़ के कहर से खासतौर पर देश में दालों की किल्लत तो आ ही चुकी है। योजना आयोग के सदस्य और जानेमाने कृषि अर्थशास्त्री अभिजीत सेन ने कहा कि सूखे और बाढ़ का देश के अनाज उत्पादन पर बुरा असर पड़ना तय है। सेन ने कहा कि पहले सूखे ने चावल उत्पादन को बुरी तरह से प्रभावित किया और अब बाढ़ से दालों का उत्पादन भी घटना तय है। इस बार उत्तर भारत में मानसून सामान्य से 22 फीसदी कम रहा और अब देश के दक्षिण, उत्तरपूर्वी और पश्चिमी राज्यों में बाढ़ ने कहर बरपाया है। दक्षिण भारत में यह एक दशक की सबसे भयंकर बाढ़ मानी जा रही है। अधिकारियों और खाद्य एजेंसियों का कहना है कि बाढ़ के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि मंत्रालय ने हालांकि अभी तक नुकसान का अनुमान जारी नहीं किया है, लेकिन सेन के मुताबिक इससे अनाज उत्पादन में करीब 10 फीसदी की कमी आ सकती है। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी कर्नाटक के महासचिव एन.जी. नारायण ने कहा कि कर्नाटक में बाढ़ से खाद्य सुरक्षा पर संकट गहरा गया है। कपड़ा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बाढ़ के कारण 6 से 7 लाख टन गांठ कॉटन का नुकसान हुआ है। आंध्र प्रदेश में प्रमुख कॉटन उत्पादक जिले कुरनूल, कृष्णा और मेहबूबनगर बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के महासचिव डी.के. नायर ने कहा कि अंतराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के भाव बढ़ सकते हैं, क्योंकि चीन और अमेरिका में उत्पादन घटने से कॉटन पर दबाव बढ़ गया है। (बिज़नस भास्कर)
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