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02 अक्टूबर 2009
विदेशी निवेश सीमा पर कमोडिटी एक्सचेंजों को मिला और समय
सरकार ने कमोडिटी एक्सचेंजों को विदेशी निवेश संबंधी दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए दूसरी बार छह माह का समय दिया है। एक्सचेंजों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने केपिटल स्ट्रक्चर में बदलाव करके अगले मार्च तक विदेशी निवेश की उच्चतम सीमा के तहत लाएं। किसी कमोडिटी एक्सचेंज में किसी एक विदेशी निवेशक के पास पांच फीसदी से ज्यादा इक्विटी नहीं हो सकती है जबकि कुल विदेशी निवेश 49 फीसदी हो सकता है।औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग ने कहा है कि कमोडिटी एक्सचेंजों के सामने यह आखिरी मौका है। विभाग ने 19 अगस्त, 2008 को यह निर्देश जारी करके कहा था कि कमोडिटी एक्सचेंजों को चाहिए कि कुल विदेशी निवेश 49 फीसदी के स्तर पर लाएं। इसमें पोर्टफोलियो निवेश को 23 फीसदी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 26 फीसदी के स्तर तक रखा जाना चाहिए। विभाग का यह भी निर्देश था कि कमोडिटी एक्सचेंज में किसी भी विदेशी निवेशक की हिस्सेदारी पांच फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।इस विभाग के प्रेस नोट- 7 में कहा गया था कि इसे निश्चित समय सीमा में लागू कर दिया जाना चाहिए। इसके पहले इस विभाग ने इस मामले में कमोडिटी एक्सचेंजों के लिए 30 जून तक की समय सीमा निर्धारित की थी जिसे बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया था। देश का प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स इन निर्देशों के अनुसार केपिटल स्ट्रक्चर में बदलाव कर रहा है। हालांकि अभी भी कई विदेशी निवेशकों के पास इस एक्सचेंज की पांच फीसदी से ज्यादा इक्विटी है। एनसीडीईएक्स में 5 फीसदी के अतिरिक्त इक्विटी बेचने के लिए आईसीई व गोल्डमैन सैक्स ने समझौता किया है। सभी कमोडिटी एक्सचेंजों को यह भी निर्देश जारी किया गया है कि वे विदेशी निवेश के मामलों पर औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग, उपभोक्ता मामलों के विभाग, विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड, फॉरवर्ड मार्केट कमीशन और सेबी को सूचित करें। (बिज़नस भास्कर)
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