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23 अक्टूबर 2009
किसानों की लागत बढ़ी पर पूसा धान का भाव पिछले साल के मुकाबले आधा
पूसा 1121 बासमती चावल को लेकर ईरान के साथ विवाद खत्म हो जाने पर भी किसानों को इस प्रीमियम किस्म के धान का भाव पिछले के मुकाबले साल बमुश्किल 50 फीसदी मिल पा रहा है। पिछले साल पंजाब और हरियाणा की मंडियों मे 3500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी पूसा 1121 धान इस साल 1800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। इस साल मानसून की देरी के कारण ज्यादा किसानों ने इस किस्म के धान की बुवाई की। इस धान की मंडियों में आवक तो बढ़ गई है लेकिन निर्यातक खरीद में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। निर्यातकों ने आशंका जताई है कि बासमती किस्म पूसा 1121 चावल का निर्यात इस साल कम रहेगा। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि ईरान में विवाद सुलझने के बाद पूसा 1121 बासमती चावल पर आयात शुल्क 21 से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दी है। इससे ईरान को भारत से चावल का निर्यात घटेगा। वहीं पूसा 1121 को यूरोप में बासमती का दर्जा न मिलने से इसके निर्यात पर अधिक सीमा शुल्क देना पड़ रहा है। सेतिया का कहना है कि पिछले साल की तुलना में पंजाब और हरियाणा मंे पूसा 1121 का रकबा तकरीबन चार लाख हैक्टेयर बढ़ गया है। इससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। उधर मार्कफेड और हैफेड जैसी सरकारी एजेंसियों ने भी इस प्रीमियम धान की खरीद शुरू नहीं की है। करनाल मंडी के आढ़ती राजेंद्र ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से पूसा 1121 की कीमतों में करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है । करनाल मंडी में एक सप्ताह में भाव 600 रुपये गिरकर 1800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। करनाल मंडी में इस धान के ढेर लगे हंै लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इस मंडी में पूसा की रोजाना करीब फ्क् से फ्फ् हजार बोरी की है। पानीपत की समालखा मंडी के आढती शिव कुमार जैन के अनुसार आवक बढ़ते ही मंडियों में ग्राहक कम होने लगे हैं। उन्होंने भाव और गिरने की आशंका जताई है। इस साल बारिश की कमी होने के कारण किसानों को खेतों की सिंचाई डीजल फूंककर करनी पड़ी। पानीपत में गांव बांध के किसान रणवीर सिंह धनकस और छाजपुर के राजेंद्र रावल पूसा के अपेक्षित भाव न मिलने से मायूस हैं। भाव आधे रह जाने से उनकी लागत निकलना भी मुश्किल है। (बिज़नस भास्कर)
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