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29 अक्टूबर 2009
दस लाख टन और चीनी आयात की मंजूरी दे सकती है सरकार
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार 10 लाख टन अतिरिक्त चीनी (व्हाइट शुगर) के शुल्क मुक्त आयात को अनुमति दे सकती है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सरकार ने पहले दस लाख टन चीनी के आयात की जो अनुमति दी थी उसमें से भारतीय कंपनियों द्वारा अभी तक करीब आठ लाख टन आयात के सौदे किए जा चुके हैं। इसमें से करीब तीन लाख टन चीनी भारत में आ चुकी है।उद्योग सूत्रों के अनुसार चालू पेराई सीजन वर्ष 2009-10 (अक्टूबर से सितंबर) में गन्ने की कमी से चीनी का उत्पादन घटकर 160 लाख टन ही होने की संभावना है जोकि वर्ष 2008-09 के 150 लाख टन से थोड़ा ज्यादा होगा। पिछले साल पेराई सीजन के शुरू में चीनी का करीब 100 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ था लेकिन चालू पेराई सीजन के शुरू में स्टॉक मात्र 25-30 लाख टन का ही बचा होने का अनुमान है। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 225-230 लाख टन की है। ऐसे घरेलू आवश्यकताओं के पूर्ति के लिए चालू सीजन में चीनी का आयात पिछले साल से ज्यादा हो सकता है।चीनी के उत्पादन में कमी के कारण ही पिछले सीजन भारतीय कंपनियों द्वारा करीब 50 लाख टन रॉ शुगर (गैर-रिफाइंड चीनी) के आयात सौदे किए गए थे जिसमें से करीब 26 लाख टन चीनी भारत में आ चुकी है। चालू पेराई सीजन में भी 45 से 50 लाख टन रॉ-शुगर का आयात होने की संभावना है।भारत में पहुंच आयातित चीनी का भाव बंदरगाह पहुंच 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा पड़ रहा है, इसलिए कंपनियां नये सौदे करने से परहेज कर रही हैं। चीनी की आयात अवधि पहले ही सरकार बढ़ाकर मार्च 2010 तक कर चुकी हैं। दिल्ली के चीनी व्यापारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होने के कारण थोक बाजार में दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। दिल्ली थोक बाजार में बुधवार को चीनी के भाव बढ़कर 3250 रुपये और एक्स-फैक्ट्री भाव 3100-3150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। (बिज़नस भास्कर....आर अस राणा)
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