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31 अक्टूबर 2009
मिलों की मांग बढ़ने से कच्चे जूट के दाम 20 फीसदी बढ़े
मिलों की मांग बढ़ने के कारण कच्चे जूट (टीडी-5 किस्म) के दाम 1900-2000 रुपये से बढ़कर 2350-2450 रुपये प्रति क्विंटल हो चुके हैं। खरीफ सीजन के अनाज के लिए जूट बैग की मांग बढ़ने की वजह से जूट मिलों ने कच्चे जूट की खरीदारी बढ़ा दी हैं। वहीं चालू सीजन के दौरान जूट का उत्पादन पिछले सीजन के मुकाबले बढ़कर करीब एक करोड़ गांठ (180 किलोग्राम) होने का अनुमान हैं।गेंगेज जूट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अभिषेक पोद्दार ने बिजनेस भास्कर को बताया कि खरीफ विपणन सीजन में सरकारी खरीद के लिए जरूरी जूट बैग की पूर्ति करने के लिए जूट मिलों ने कच्चे जूट की खरीदारी बढ़ा दी है। इस वजह से कच्चे जूट के दाम पिछले दो माह के दौरान करीब 20 फीसदी बढ़ चुके हैं। इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन के चैयरमेन संजय कजरिया का कहना है कि मिलों की मांग के अलावा जूट वायदा कारोबार में सट्टेबाजी के चलते भी इसके मूल्यों में तेजी को बल मिला हैं। आने वाले दिनों में इसकी कीमतों में गिरावट आ सकती हैं।पोद्दार का कहना है कि जूट वायदा कारोबार में नवंबर अनुबंध न होने के कारण इसके मूल्यों में कमी आ सकती हैं। उनका कहना है पिछले चार दिनों के दौरान ही जूट के मूल्यों में 50 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जूट अक्टूबर वायदा के दाम पिछले चार दिनों के दौरान 2404.50 रुपये से घटकर 2369 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। हालांकि पिछले दो माह के दौरान एमसीएक्स में अक्टूबर वायदा के दाम 1992.50 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2369 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं।सरकार ने जूट के उत्पादन में आ रही कमी के मद्देनजर जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की है। सीजन 2009-10 के लिए सरकार ने एमएसपी को दस फीसदी बढ़ाकर 1375 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। चालू सीजन के दौरान देश में जूट का उत्पादन एक करोड़ गांठ से अधिक होने की संभावना है। सीजन 2008-09 के दौरान देश में 99 लाख गांठ जूट का उत्पादन हुआ था।उल्लेखनीय है कि नई फसल के पहले जुलाई में पिछली समान अवधि के मुकाबले जूट के दाम दोगुने बढ़कर 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक चले गए थे। इसकी कीमतों में वृद्धि का कारण वायदा कारोबार में सट्टेबाजी था। (बिज़नस भास्कर)
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