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04 अगस्त 2009
बीते सीजन वर्ष में कॉटन निर्यात लक्ष्य से भी कम
जून के मुकाबले जुलाई महीने में देश से कॉटन निर्यात सौदों में 66 फीसदी की गिरावट आई है। सूत्रों के अनुसार टैक्सटाइल कमिश्नर के आफिस में जुलाई महीने में भारत से कॉटन निर्यात के लिए 121,368 गांठ (एक गांठ 170 किलो) के सौदे पंजीकृत हुए हैं तथा इसमें से 22,547 गांठ की शिपमेंट हुई हैं। जबकि जून महीने में 360,117 गांठ के सौदे पंजीकृत हुए थे तथा 396,659 गांठ की शिपमेंट हुई थी।चालू कपास सीजन (अगस्त से जुलाई) के दौरान कमिश्नर आफिस में कॉटन के कुल 32.52 लाख गांठ के सौदे ही पंजीकृत हुए हैं तथा इसमें से 27.22 लाख गांठ की शिपमेंट हुई है। वर्ष 2007-08 में देश से 85 लाख गांठ का निर्यात हुआ था जबकि वर्ष 2008-09 में निर्यात का लक्ष्य 50 लाख गांठ का रखा था। निर्यात में गिरावट का प्रमुख कारण घरेलू बाजार के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के दाम नीचे होना है। न्यूयार्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में कॉटन के अक्टूबर वायदा में भाव इस समय 57.93 सेंट प्रति पाउंड चल रहे हैं जबकि 31 जुलाई 2008 को वायदा में इसके दाम 71.65 सेंट प्रति पाउंड थे। पिछले साल के मुकाबले इस समय भाव 13.72 फीसदी नीचे हैं।उधर कॉटलुक इंडेक्स में इस समय कॉटन के दाम 64.05 सेंट प्रति पांउड चल रहे हैं तथा पिछले एक महीने में ही इसमें 1.25त्न की गिरावट आ चुकी है। अबोहर स्थित कमल कॉटन ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरक्टर राकेश राठी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के भाव भारत की तुलना में कम होने के कारण भारत से निर्यात में तेजी नहीं आ पा रही है। इस समय घरेलू बाजार में शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 23,200- 23,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी 356 किलो) चल रहे हैं। भारत में भाव ऊंचे होने के कारण इस दौरान भारत से चीन की मांग काफी कमजोर रही। चीन सरकार द्वारा रिजर्व स्टॉक में रखी कॉटन की बिकवाली करने से इस साल चीन की कॉटन में अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीद काफी कमजोर रही है। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी नहीं बन पाई। (Business Bhaskar)
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