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14 अगस्त 2009
सरकार हटाएगी चीनी आयात की बाधाएं
चीनी के आयात में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ठोस कदम उठाएगी। गुरुवार को सचिव की कमेटी की बैठक में केबिनेट सचिव के. एम. चंद्रशेखर ने खाद्य मंत्रालय को चीनी के आयात में आ कठिनाइयों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। उधर देश में सूखे की स्थिति के बावजूद खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक होने के कारण ज्यादा मुश्किल नहीं है।बैठक में खाद्य मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया गया कि रॉ-शुगर का आयात तेज किया जाए। चीनी आयात के कागरे क्लियरेंस में देरी और सौदों की प्रक्रिया धीमी गति से समस्या आ रही है। सरकारी एजेंसियों एमएमटीसी, पीईसी और एसटीसी ने अप्रैल से अभी तक एक लाख टन से भी कम चीनी आयात के सौदे किए हैं। जबकि इन सरकारी एजेंसियों को दस लाख टन शुल्क मुक्त चीनी चीनी आयात करने के लिए कहा गया था। मालूम हो कि हाल ही में संसद में केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री शरद पवार ने बताया था कि प्राइवेट कंपनियां 29 लाख टन रॉ शुगर आयात के सौदे कर चुकी हैं।भारत में 2008-09 पेराई सीजन (अक्टूबर से दिसंबर) में चीनी का उत्पादन 150 लाख टन होने की संभावना है। पिछले साल 264 लाख टन का उत्पादन हुआ था। नए सीजन में भी चीनी के उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी होकर उत्पादन 160-170 लाख टन से ज्यादा होने की संभावना नहीं है। जबकि देश की सालाना खपत 225 से 230 लाख टन की है। उधर देश के अधिकांश हिस्से में भले ही सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, इसके बावजूद मुश्किल के दौर में सरकार के पास तीन महीने तक एक अरब से ज्यादा आबादी की खपत के लिए पर्याप्त खाद्यान्न स्टॉक मौजूद है। अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केंद्र के पास जुलाई के आखिर में 504 लाख टन अनाज का स्टॉक मौजूद था। इसमें 187.9 लाख टन चावल और 316.2 लाख टन गेहूं था। (Busienss Bhaskar)
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