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14 अगस्त 2009
राज्यों पर स्टॉक लिमिट लगाने का दबाव
कृषि जिंसों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश के लिए केंद्र सरकार राज्यों पर स्टॉक लिमिट लगाने का दबाव बनाएगी। स्टॉक लिमिट लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। ऐसे में कुछ राज्यों द्वारा स्टॉक लिमिट लगाए जाने से स्टॉकिस्ट अपने स्टॉक को हटा कर दूसरे राज्यों में रख देते हैं। नतीजतन स्टॉक लिमिट लगाने के बावजूद जिंसों की कीमतों पर नियंत्रण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। दिल्ली, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के अलावा कई और राज्यों ने दलहन तथा चीनी पर स्टॉक लिमिट लगा रखी है। उधर उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों ने भी स्टॉक लिमिट नहीं लगाई है।17 अगस्त को प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। खाद्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में जिन राज्यों ने स्टॉक लिमिट नहीं लगाई है उन पर भी स्टॉक लिमिट लगाने का दबाव बनाया जाएगा ताकि जिंसों की बढ़ती कीमतों को काबू में किया जा सके। इसके अलावा आने वाले दिनों में केंद्र सरकार खुले बाजार में आवश्यक जिंसों की सप्लाई भी बढ़ा सकती है।देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में अपर्याप्त वर्षा से धान, तिलहन और गन्ने का बुवाई क्षेत्रफल घटा है। जिन क्षेत्रों में बुवाई हुई है वहां भी बारिश न होने से फसलें सूखने के कगार पर हैं। इससे चालू खरीफ सीजन में खाद्यान्न उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका बन गई है। चावल के बुवाई क्षेत्रफल में तो भारी कमी आई ही है, साथ ही प्रति हेक्टेयर उत्पादन में कमी से उत्पादन लगभग 200 लाख टन घटने की आशंका है। उत्पादन में गिरावट की आशंका के परिणामस्वरूप ही खाद्यान्नों की कीमतों में तेजी बननी शुरू हो गई है। पिछले एक सप्ताह में चावल की कीमतों में करीब दस फीसदी, मोटे अनाजों की कीमतों में पंद्रह फीसदी, चीनी के दामों में बीस फीसदी और खाद्य तेलों की कीमतों में लगभग दस फीसदी की तेजी आ चुकी है। दलहन के भाव वैसे ही रिकार्ड स्तर पर चल रहे हैं।वैसे तो केंद्रीय पूल में सरकार के पास गेहूं का 329 लाख टन और चावल का 196 लाख टन का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है लेकिन उत्पादन में गिरावट से चीनी, दलहन और खाद्य तेलों के आयात में और बढ़ोतरी हो सकती है। (Business Bhaskar....R S Rana)
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