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03 अगस्त 2009
बीज-खाद डालने की ज्यादा असरकारी मशीन
बीज और खाद डालने की पारंपरिक विधि पानी की कमी से प्रभावित खेतों में खासी उपयोगी नहीं हो पाती है। ऐसे खेतों में फसल के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा बीज और खाद की जरूरत पड़ती है। पिछले कुछ वर्षो के दौरान बारिश में कमी खेती के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। बारिश कम होने की वजह से खेतों में बुवाई के समय नमी कम रह जाती है। इस वजह से पौधों का विकास प्रभावित होने के अलावा बीज और खाद जमीन में अच्छी तरह से नहीं पहुंच जाती है। ऐसे में बीज और खाद दोनों बेकार चले जाते हैं। इससे फसल को होने वाले फायदे में भी कमी देखी जा रही है। इन हालातों में जरूरत ऐसे बीज और खाद की बुवाई करने वाले यंत्र उपयोगी हो सकते हैं जिनके माध्यम से बीज और खाद का जमीन पर बेहतर तरीके से छिड़काव किया जा सके और उनका पूरा-पूरा फायदा मिले। अगर इनका पूरा फायदा मिले तो फसल की ज्यादा पैदावार मिल सकती है। किसानों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) दिल्ली के कृषि अभियांत्रिकीय संभाग ने बुवाई मशीन विकसित की है। इसे एक्वा फर्टि सीड ड्रिल नाम की इस मशीन की अनुमानित कीमत 25000 रुपये है। कृषि अभियांत्रिकीय संभाग के अध्यक्ष डॉ. डी. वी. के. सेम्युअल ने बताया कि यह मशीन उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जिन इलाकों में गेहूं की बुवाई के समय जमीन में नमी नहीं होती है। इस मशीन में बीज के साथ-साथ रसायनिक खाद को पानी के साथ मिलाकर घोल बना लिया जाता है। ऐसा करने से फसल के जमने के समय जमीन में नमी और पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं। इस मशीन को 45 हॉर्स पावर वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है।इस मशीन के माध्यम से एक घंटे में एक एकड़ जमीन में बीज की बुवाई खाद के साथ की जा सकती है। उनका कहना है कि इस मशीन का सबसे बड़ा फायदा खाद का घोल बनाकर जमीन में डालने से होता है। ऐसा करने से खाद जमीन के अंदर भली-भांति पहुंच जाता है। दरअसल खाद और पानी के घोल से जमीन में नमी की कमी की भी पूर्ति हो जाती है। जिससे फसल को काफी फायदा होता है। उनके अनुसार अन्य मशीनों के माध्यम से न तो जमीन को नमी मिल पाती है और न ही सही तरीके से खाद जमीन के अंदर पहुंच पाता है। इस मशीन के माध्यम से खाद की बर्बादी रोकी जा सकती है। डॉ. सेम्युअल के अनुसार इस मशीन में सीड मीटरिंग डिवाइस होती है। इसकी बनावट इस तरह की होती है कि खाद जमीन के अंदर चला जाता है जबकि सामान्य सीड ड्रिल में खाद के कुछ दाने जमीन के ऊपर रह जाते है। इन दानों से फसल को कोई फायदा नहीं होता है। खाद के अलावा इस डिवाइस से बीज की ठीक ढंग से बर्बादी होने से इसकी बर्बादी रोकी जा सकता है। बीज भरने के लिए इसमें लोहे का टैंक लगा रहता है। मीटरिंग डिवाइस के ग्रूफ इस तरह के बनाए गए है कि बुवाई के दौरान इसमें बीज फंसते नहीं है बल्कि वे पूरी तरह से मिट्टी के अंदर चले जाते हैं। इस मशीन में 200 लीटर क्षमता वाली प्लास्टिक की टंकी होती है। जिसमें खाद और पानी का घोल भरा जाता है। मशीन में नौ फैरो होते है। प्रत्येक फैरो को खाद भरे हुए प्लास्टिक टैंक से पाइप से जोड़ देते हैं। इन पाइप के माध्यम से ही खाद का घोल जमीन के अंदर जाता है। इस मशीन का वजन 200 किलोग्राम है। डॉं सेम्युअल का कहना है कि इस मशीन को विकसित करने के लिए पिछले चार वर्षे से काम चल रहा था। वर्ष 2008 में इसका पहला मॉडल लांच किया गया। फिलहाल इसमें सुधार का काम चल रहा है। इस मशीन में सुधार करने के बाद अगले साल तक इसे किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। डॉ. सेम्युअल ने बताया कि जैसे ही मशीन पूरी तरह से तैयार हो जाएगी, वैसे ही मशीन निर्माता कंपनियों के साथ समझौते करके यह तकनीक उपलब्ध करा दी जाएगी। बहरहाल इस मशीन के आने के बाद कम नमी वाले खेतों में भी अधिक उत्पादन लेने में काफी मदद मिलेगी। यह मशीन बारिश में कमी के कारण अनाज उत्पादन में कमी को रोकने में सहायक साबित होगी। इस मशीन की वास्तविकत उपयोगिता का परीक्षण तभी हो सकेगा जब किसान इसके माध्यम से बुवाई करेंगे। उस समय किसानों को पता चलेगा कि यह मशीन खाद व बीज की बर्बादी रोकने और पैदावार बढ़ाने में कितनी उपयोगी है। (Business Bhaskar)
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