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20 अगस्त 2009
चावल उत्पादन 100 लाख टन कम रहेगा
केंद्र सरकार ने भी अब स्वीकार कर लिया है कि मानसून की बेरुखी से चालू खरीफ सीजन के दौरान देश में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट दर्ज की जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को यहां एक सम्मेलन में राज्यों के खाद्य मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि चावल उत्पादन में 100 लाख टन की कमी आ सकती है। गौरतलब है कि बिजनेस भास्कर ने पहली अगस्त के अंक में इस साल चावल उत्पादन के 9.9 करोड़ टन से घटकर 7.5 करोड़ रह जाने की आशंका जताई थी। इसके अलावा तिलहन और चीनी के उत्पादन में भी कमी आने की आशंका है।इस साल कम बारिश के चलते देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसलिए चीनी और दालों की चढ़ती कीमतों की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को आगामी दिनों में चावल के लिए भी ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि, केंद्रीय पूल में सरकार के पास 504 लाख टन गेहूं और चावल का भंडार मौजूद है। पवार ने माना कि खरीफ पैदावार में गिरावट से खाद्यान्नों की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसलिए खाद्यान्नों की कीमतों को काबू में रखने के लिए यदि जरूरत पड़ी तो सरकार खुला बाजार बिक्री योजना के तहत गेहूं और चावल की बिक्री शुरू करने से हिचकिचाएगी नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार अपने भंडार को बढ़ाने के लिए अनाज की ज्यादा खरीदारी करेगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को मजबूत करेगी।उन्होंने राज्यों से कहा कि वे प्राइवेट मिलों द्वारा खरीदे जाने वाले धान के आधे हिस्से के बराबर खरीद सुनिश्चित करें। राज्यों को धान की अधिकतम खरीद करनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए आवंटन में काई रुकावट न हो। पीडीएस के तहत प्रमुख खाद्यान्नों की अधिक से अधिक सप्लाई की जाएगी। इसके अलावा राज्यों को राइस मिलों द्वारा खरीदे जाने वाले धान पर न्यूनतम 50 फीसदी लेवी लगाने की भी सलाह दी गई है।चालू खरीद सीजन में केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 326 लाख टन चावल और 253 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदारी की है। इससे सरकार को सूखा प्रभावित जिलों में हालात को नियंत्रण में रखने में आसानी होगी। केंद्र सरकार आयातित दालों पर दी जा रही 10 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी को राशन दुकानों के लिए भी लागू करने की योजना बना रही है। (Business Bhaskar...R S Rana)
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