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02 अप्रैल 2009
म्यांमार से सप्लाई घटने के चलते उड़द और अरहर में तेजी का रुख
म्यांमार की सप्लाई घटने से पिछले पंद्रह दिनों में उड़द और अरहर के भावों में क्रमश: 9 व 15 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। प्रतिकूल मौसम से घरेलू पैदावार में कमी और स्टॉकिस्टों की सक्रियता से तेजी को बल मिला है। हाजिर बाजार में कमजोर स्टॉक से मौजूदा भावों में और भी तेजी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।जलगांव दाल मिलर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कोगता ने बताया कि उड़द और अरहर की घरेलू पैदावार में कमी आने से म्यांमार के निर्यातकों ने भी भाव बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इस कारण आयातक लिवाली कम कर रहे हैं। घरेलू बाजार में भी उड़द का स्टॉक काफी कम है तथा अरहर की आवक भी महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश की मंडियों में काफी घट गई है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले पंद्रह दिनों में उड़द के भावों में 250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर मुंबई में म्यांमार की उड़द के भाव 2850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। देशी उड़द के भाव जलगांव मंडी में बढ़कर इस दौरान 3200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि 16 मार्च को इसके भाव 2950 रुपये प्रति क्विंटल थे। विजयवाड़ा मंडी में इसके भाव बढ़कर 3350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सरकारी एजेंसियों एसटीसी, एमएमटीसी, पीईसी और नैफेड द्वारा चालू वित्त वर्ष में अभी तक लगभग एक लाख चालीस हजार टन उड़द के आयात सौदे किए हैं। म्यांमार के निर्यातकों ने अप्रैल डिलीवरी शिपमेंट उड़द के भाव बढ़ाकर 550 से 570 डॉलर प्रति टन बोलने शुरू कर दिए हैं।दलहन आयातक संतोष उपाध्याय ने बताया कि घरेलू फसल की आवक घटने और म्यांमार के निर्यातकों द्वारा भाव बढ़ा देने से पिछले पंद्रह दिनों में अरहर के भावों में 450 रुपये प्रति क्विंटल की भारी तेजी आ चुकी है। मुंबई में आयातित अरहर के भाव बढ़कर 3450 रुपये और देशी अरहर के भाव बढ़कर 3675 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। अप्रैल शिपमेंट डिलीवरी की कीमतें बढ़ाकर 680-700 डॉलर प्रति टन बोलनी शुरू कर दी हैं। मार्च के मध्य में इसके दाम 610-620 डॉलर प्रति टन थे। म्यांमार में अरहर की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन बिकवाली कम आने से भाव घट नहीं रहे हैं। सरकारी एजेंसियों ने अभी तक लगभग 84,140 टन आयात के सौदे किए हैं। दाल मिलर्स सुनील बंदेवार ने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश की उत्पादक मंडियों में अरहर की दैनिक आवक घटकर मात्र 20 से 25 हजार बोरी की रह गई जबकि चालू महीने के मध्य में इसकी दैनिक आवक करीब 40 से 50 हजार बोरी की हो रही थी। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के मुताबिक चालू फसल सीजन में देश में अरहर की पैदावार घटकर 24 लाख टन ही होने की संभावना है। जबकि पैदावार का लक्ष्य 29 लाख टन का था। पिछले वर्ष देश में इसकी पैदावार 30 लाख टन की हुई थी। (Business Bhaskar....R S Rana)
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