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02 मार्च 2009
खाद्य तेलों के रिकार्ड आयात से घरेलू बाजार में कीमतें घटीं
पिछले तीन महीने में देश में रिकार्ड खाद्य तेलों का आयात हुआ है जबकि घरेलू बाजार में रबी तिलहनों की फसल की आवक भी शुरू हो गई है। इसलिए घरेलू बाजारों में खाद्य तेलों के थोक भाव में गिरावट बननी शुरू हो गई है। आगामी दिनों में घरेलू फसल की आवक का दबाव बनने पर खाद्य तेलों के मौजूदा भावों में और भी गिरावट की संभावना है।सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार पिछले तीन महीनों (नवंबर, दिसंबर और जनवरी) में देश में खाद्य तेलों का रिकार्ड आयात 20 लाख टन रहा है। पिछले वर्ष की समान अवधि में खाद्य तेलों का आयात 10.81 लाख टन का ही हुआ था। आयातित खाद्य तेलों में सबसे ज्यादा मात्रा क्रूड पाम तेल की है। पिछले साल के शुरू में घरेलू बाजार में भाव तेज होने के कारण अप्रैल महीने में सरकार ने क्रूड पाम तेल से आयात शुल्क हटा दिया था। जबकि पिछले दिनों घरेलू उद्योगों ने इस पर आयात शुल्क लगाने की मांग की थी। इसलिए आयात शुल्क लगने की संभावनाओं के चलते ही आयातकों ने पिछले तीन महीने में भारी मात्रा में खाद्य तेलों का आयात किया है।दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों की आवक उत्पादक राज्यों की मंडियों में बढ़कर एक से सवा लाख बोरी की हो गई है। उधर सोयाबीन की भी करीब सवा से डेढ़ लाख बोरी की दैनिक आवक अभी भी बनी हुई है। उत्पादक राज्यों की मंडियों में मूंगफली और कपास की आवक भी बराबर बनी हुई है। अत: भारी मात्रा में आयातित खाद्य तेलों की बिकवाली के साथ-साथ घरेलू फसलों की आवक बढ़ने से पिछले डेढ़ महीने में खाद्य तेलों के थोक भावों में 40 से 100 रुपये प्रति 10 किलो की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान सबसे ज्यादा गिरावट सरसों तेल के भावों में देखी गई। दिल्ली बाजार में सरसों तेल के भाव 620-630 रुपये से घटकर 510-520 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। सरसों की नई फसल आने से सरसों तेल की मांग में काफी कमी आई है। अन्य खाद्य तेलों में मूंगफली तेल के भाव 620-630 रुपये से घटकर 570-580 रुपये, सोया रिफाइंड तेल के भाव 480-490 रुपये से घटकर 440-450 रुपये और बिनौला तेल के भाव भी 450 से घटकर 410 रुपये प्रति 10 किलो ग्राम रह गए।केंद्र सरकार द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक चालू रबी सीजन में देश में सरसों की पैदावार पिछले वर्ष के 58 लाख टन से बढ़कर 69 लाख टन होने की उम्मीद है। दिल्ली के खाद्य तेलों के व्यापारी सरदार अजीत सिंह ने बताया कि मार्च में सरसों की आवक का दबाव तो बन ही जाएगा। साथ ही आयातित खाद्य तेलों की बिकवाली बढ़ने से घरेलू बाजारों में खाद्य तेलों के मौजूदा भावों में और भी गिरावट की संभावना है। (Business Bhaskar)
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