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18 मार्च 2009
मेटल की मांग व मूल्य में सुधार की आशा नहीं
चालू वर्ष मेटल कमोडिटी के लिए अच्छा नहीं रहेगा। दुनिया की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी रियो टिंटो लिमिट़ेड का अनुमान है कि इस साल कमोडिटी मार्केट में कोई सुधार होने की कोई उम्मीद नहीं है। इससे उसके मुनाफे पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। मंदी के ताजे अनुमान के चलते कंपनी अल्यूमीनियम कारपोरेशन ऑफ चायना के साथ 19.5 अरब डॉलर का सौदा करने को मजबूर हो सकती है। उसे 38.7 अरब डॉलर के भारी-भरकम कर्ज से राहत के लिए मदद की जरूरत है। इस मसले पर आस्ट्रेलिया सरकार की मंजूरी इस समय बड़ी बाधा है। आस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री सिमोन क्रेन के मुताबिक इस सौदे को मंजूरी राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर दी जाएगी। साथ ही चीन के साथ मुक्त व्यापार की शर्त पर यह सौदा होगा। अपने वार्षिक रिपोर्ट में रियो टिंटो ने कहा है कि आने वाले दिनों में भी गिरावट का दौर जारी रह सकता है। इस साल की दूसर छमाही में भी सुधार की संभावना नहीं है। इस साल चीन में धातुओं की मांग में एकल अंकीय बढ़ोतरी होने से जिंसों की कीमतों में सुधार की गुंजाइश नहीं है। रियो टिंटो ने आशंका जताई है कि चीन में मांग घटने से आयरन ओर की कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है। ऐसे में आने वाला समय काफी चुनौतियों भरा होगा। इससे कंपनी का मुनाफा व दूसरे लिहाज से प्रदर्शन फीका रह सकता है। हालांकि इस निराशाजनक तस्वीर के बावजूद रियो टिंटो के चेयरमैन पॉल स्किनर ने आने वाले सालों के दौरान चीन से काफी उम्मीदें जताई हैं। उनके मुताबिक चीन में मांग बढ़ने से यहां दीर्घकाल में जिंसों की तेजी को सहारा मिलेगा। जिसका सहारा वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। गौरतलब है कि पिछले साल की दूसरी तिमाही के बाद से वैश्विक बाजार में विभिन्न जिसों की कीमतों में गिरावट आई है। औद्योगकि उत्पादन में गिरावट की वजह से मेटल जैसी औद्योगिक जिंसों की मांग में कमी आई है। जिसका असर कीमतों पर पड़ा है। अब तक दूनिया के औद्योगिक उत्पादन में सुधार के संकेत नहीं दिख सके हैं। लिहाजा आने वाले समय में भी मेटल की कीमतों में भी सुधार की संभावना नहीं है। हालांकि इस दौरान चीन के स्टेट रिजर्व ब्यूरो ने कॉपर और अल्यूमीनियम की खरीद कर स्टॉक बनाने की शुरूआत की है। चीन का यह कदम घरेलू उत्पादकों को सहारा देने के लिए था। लेकिन इस कदम से वैश्विक बाजार में एक उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद में इसका भी खास असर नहीं रहा। दूसरी तरफ डॉलर में आ रही मजबूती की वजह से भी धातुओं के कारोबार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। (Business Bhaskar)
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