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06 मार्च 2009
काली मिर्च निर्यात में कमी की आशंका
चालू वित्त वर्ष के दौरान काली मिर्च के निर्यात में करीब 30 फीसदी की गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों में वियतनाम की नई फसल की आवक बढ़ने से भारतीय काली मिर्च की मांग में कमी आई है। निर्यातकों के मुताबिक इस साल मार्च के अंत तक करीब 24,500 टन काली मिर्च निर्यात की संभावना है। जबकि पिछले साल करीब 35 हजार टन काली मिर्च का निर्यात हुआ था। कार्वी काम्ट्रेड के रिसर्च एनालिस्ट वीरश के मुताबिक मौजूदा समय में ज्यादातर खरीददार वियतनाम के नई फसल की आवक का इंतजार कर रहे हैं। लिहाजा भारतीय बिकवालों के पास विदेशी ऑर्डर बेहद कम हैं। भारतीय मसाला बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी के दौरान काली मिर्च के निर्यात में करीब 27 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान यहां से करीब 21,600 टन काली मिर्च का निर्यात हो सका है। पूर भारतीय काली मिर्च निर्यात में अमेरिका को करीब 60 फीसदी भेजी गई। करीब 20 फीसदी काली मिर्च यूरोप को निर्यात होती है। दुनिया भर में वियतनाम के बाद भारत काली मिर्च का दूसरा प्रमुख निर्यातक देश है। मौजूदा समय में वैश्विक बाजारों में भारतीय काली मिर्च काफी महंगी बैठ रही है। लिहाजा खरीददार वियतनाम की नई फसल का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि निर्यात ऑर्डर में आई कमी की वजह से घरलू बाजारों में काली मिर्च की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है। इस दौरान एनसीडीईएक्स में काली मिर्च वायदा करीब 10,732 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करता देखा गया। मौजूदा समय में वैश्विक बाजारों में भारत की एमजी1 काली मिर्च करीब 2200 डॉलर प्रति टन बोली जा रही है। जबकि वियतनाम की 550 जीएल काली मिर्च करीब 2,000 डॉलर प्रति टन है। जानकारों के मुताबिक मध्य मार्च में जब वियतनाम की काली मिर्च की आवक बढ़ेगी, तब घरलू बाजारों में काली मिर्च की कीमत करीब दस हजार रुपये प्रति `िंटल से नीचे आ सकती हैं। (Business Bhaskar)
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