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21 मार्च 2009
सोया तेल पर आयात शुल्क हटने से नुकसान
नई दिल्ली. खाद्य तेलों का सस्ता आयात चुनावी साल में कहीं केंद्र सरकार को महंगा न पड़ जाए। इस समय जबकि उत्पादक मंडियों में रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों की आवक उत्पादक मंडियों में जोरों पर है तथा भावों में पिछले एक महीने में करीब 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा क्रूड सोया तेल के आयात (अभी नोटिफिकेशन जारी नहीं) पर शुल्क हटा लेने से सरसों के भावों में और भी गिरावट आ सकती है। जिससे किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ सकता है।सेंट्रल आर्गनाइजेशन फार आयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कोएट) के अध्यक्ष देवेश जैन ने कहा कि चालू तेल वर्ष के पहले चार महीनों नवंबर से फरवरी तक देश में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 2,824,941 टन का हो चुका है जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 1,152,695 टन का ही हुआ था। आयात में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण ही इस समय थोक बाजार में खाद्य तेलों के भाव मार्च 2008 के रिकार्ड स्तर के मुकाबले 30 से 50 फीसदी तक घट चुके हैं। उत्पादक मंडियों में सरसों की फसल की आवक का दबाव बना हुआ है तथा पिछले एक महीने में सरसों के भावों में करीब 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आकर उत्पादक मंडियों में सरसों के भाव 1900 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। जबकि सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1830 रुपये प्रति क्विंटल है। पिछले सीजन में मार्च-अप्रैल में उत्पादक मंडियों में सरसों 2700-2800 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर ही बिकी थी। ऐसे समय में आयात शुल्क समाप्त करने से किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा। पिछले साल सरसों के ऊंचे भावों के कारण ही किसानों ने चालू सीजन में सरसों की बुवाई ज्यादा क्षेत्रफल में की है। लेकिन अगर किसानों को वाजिब दाम नहीं मिला तो आगामी वर्ष में फिर सरसों की बुवाई में कमी आ सकती है। पिछले वर्ष देश में 63 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था। चालू तेल वर्ष में पहले चार महीनों में आयात में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए आयात में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिशन के सचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि आयातित खाद्य तेलों पर हमारी निर्भरता लगातार बढ़ रही है। आयातित खाद्य तेलों की निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार को तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में ज्यादा बढ़ोतरी करनी चाहिए। जिससे किसान तिलहनों की खेती ज्यादा करें। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008-09 में देश में सरसों की पैदावार पिछले साल के 50 लाख टन से बढ़कर 65 लाख टन होने की संभावना है। सामान्यत: देश में सरसों की सालाना खपत 70 लाख टन की होती है। (Business Bhaskar....R S Rana)
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