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10 मार्च 2009
चार साल में दोगुनी हो जाएगी कॉपर की खपत
भारत में अगले चार सालों के दौरान कॉपर की खपत बढ़कर करीब दोगुनी होने की संभावना है। पावर सेक्टर में तेज विकास होने पर कॉपर की खपत बढ़ सकतीच है। इससे अगले चार साल में कॉपर की घरलू खपत बढ़कर करीब 11 लाख टन हो सकती है जो दोगुनी होगी।हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष एस. के. शर्मा ने बताया कि बीते वर्ष 2008 में कॉपर की घरेलू खपत करीब 547,000 टन होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार द्वारा पावर सेक्टर में निवेश बढ़ाने की वजह से अगले चार सालों में प्रति व्यक्ति कॉपर की खपत में तगड़ी तेजी आने की संभावना है। मौजूदा समय में भारत में कॉपर की प्रति व्यक्ति खपत करीब 600 ग्राम है। जबकि चीन में प्रति व्यक्ति खपत भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। उन्होंने बताया कि भारत में साल 2017 तक करीब 145 गीगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की योजना है। मौजूदा समय में यहां करीब 141 गीगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। पावर सेक्टर में मुख्य रूप से कॉपर केबल, तार और ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में कॉपर की खपत होती है। शर्मा में बताया कि मौजूदा समय में देश में करीब 13.8 करोड़ घरों में बिजली की पहुंच नहीं है। लिहाजा आने वाले समय में कॉपर के लिए काफी उम्मीदें हैं। घरलू मांग बढ़ने की वजह से ही भारत को कॉपर निर्यात में कटौती करनी पड़ी है। चालू साल के दौरान कॉपर के उत्पादन का करीब 70 फीसदी हिस्सा घरलू बाजार में ही बिकने की संभावना है। अभी 60 फीसदी कॉपर घरेलू बाजार में बिक रहा है। वर्ष 2008 के दौरान देश में करीब 708,000 टन रिफाइंड कॉपर का उत्पादन हुआ। मौजूदा समय में कई क्षेत्रों में मांग घटने की वजह से कॉपर की कीमतों में गिरावट आई है। भवन निर्माण और ढांचागत क्षेत्र में भी कॉपर की मांग रहती है। लेकिन वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों की मांग घटने से कॉपर में गिरावट दर्ज की गई है। (BS Hindi)
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