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05 मार्च 2009
विदेशी चीनी की भारत में सप्लाई हो सकती है मुश्किल
डॉलर के मुकाबले रसातल में पहुंचे रुपया ने रॉ शुगर आयात के जरिये देश में चीनी की सुलभता बढ़ाने की सरकारी योजना खटाई में डाल दी है। पहले तो भारत में चीनी उत्पादन घटने की संभावना के कारण विश्व बाजार में रॉ शुगर महंगी हो गई। अब रुपया गिरने से इसका आयात और महंगा हो जाएगा। मौजूदा दौर में चीनी में कुछ मूल्य गिरावट आने की गुंजाइश और कम हो गई है। चालू वर्ष में देश में चीनी के उत्पादन में आई भारी गिरावट से चिंतित केंद्र सरकार ने रॉ शुगर के आयात नियमों में तो बदलाव किया ही है, साथ ही स्टॉक लिमिट भी लगा दी गई है। हालांकि ये अलग बात है कि अभी तक किसी भी राज्य सरकार ने स्टॉक लिमिट लागू नहीं की है। चीनी व्यापारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि रॉ शुगर में भारत की मांग आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में लगभग 20 डॉलर की तेजी आकर भाव 302 से 303 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। रॉ शुगर को रिफाइंड करने पर भी करीब 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आता है। रुपया कमजोर होने से मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मूल्य के आधार पर रॉ शुगर का (एफओबी) भाव 1575 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। पिछले दो माह में रुपया करीब तीन फीसदी कमजोर हो चुका है। इस तरह रॉ शुगर इतनी ही महंगी हो गई है।स्टॉक लिमिट जल्दी ही लगने की संभावना के चलते थोक बाजारों में चीनी की कीमतों में हल्की गिरावट आई है। थोक बाजार में इसके दाम घटकर 2260 से 2290 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। केंद्र ने पिछले महीने चीनी मिलों को शुल्क रहित रॉ शुगर आयात करके घरेलू बाजारों में बेचने की अनुमति दी थी। इसके अलावा हाल ही में केंद्र सरकार ने चीनी पर स्टॉक लिमिट भी लगा दी है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में चीनी का उत्पादन घटकर 160 लाख टन रहने की संभावना है। हालांकि खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले सप्ताह 165 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद व्यक्त की थी। पिछले वर्ष चीनी का उत्पादन 264 लाख टन का हुआ था। ऐसे में घरेलू आवश्यकता की पूर्ति के लिए करीब 12 से 15 लाख टन रॉ शुगर का आयात होने की संभावना है। देश में चीनी की सालाना खपत लगभग 230 लाख टन की होती है। (Business Bhaskar.....R S Rana)
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