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10 मार्च 2009
चावल निर्यातकों ने सरकार से न्यूनतम निर्यात कीमत
नई दिल्ली : घरेलू चावल निर्यातकों ने एक आकस्मिक मीटिंग में सरकार से न्यूनतम निर्यात कीमत (एमईपी) में तत्काल कटौती करने की गुहार का फैसला लिया है। निर्यातकों ने सरकार से चावल के एमईपी में कटौती की मांग करने का फैसला लिया है ताकि इस मामले में पाकिस्तान से मिल रही चुनौती से निपट सकें। अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन (एआईआरईए) इस बारे में वाणिज्य मंत्रालय से गुहार करेगा कि या तो एमईपी की व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए या फिर इसे घटाकर 800 डॉलर प्रति टन के स्तर पर ले आया जाए। पिछले हफ्ते मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने चावल के एमईपी को मौजूदा 1,100 डॉलर प्रति टन के स्तर से घटाने के प्रस्ताव को टाल दिया था। इसके बाद चावल निर्यातकों ने आपस में मिलकर इस पर विचार करने का फैसला लिया। पाकिस्तान इस वक्त 1,000 डॉलर प्रति टन के दाम पर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को बासमती की बिक्री कर रहा है। इससे घरेलू चावल निर्यातकों को काफी तगड़ी चुनौती मिल रही है। मौजूदा सीजन में 5,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाने के चलते चावल निर्यातकों ने सरकार से ड्यूटी एनटाइटलमेंट पासबुक (डीईपीबी) स्कीम के तहत फायदा देने की भी मांग की है। एक निर्यातक के मुताबिक, 'अगर सरकार एमईपी को नहीं घटाएगी तो नुकसान बढ़कर 7,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।' डीईपीबी के तहत कारोबारियों को निर्यात के एक फीसदी के बराबर का शुल्क मुक्त आयात करने की मंजूरी होती है। डीईपीबी के हस्तांतरणीय होने से निर्यातक इस लाभ को वास्तविक इस्तेमाल करने वालों को भी बेच सकते हैं। कुछ चावल निर्यातकों ने सरकार से उन्हें मुहैया कराए गए कर्ज पर ब्याज दर में दो फीसदी की कमी करने की भी मांग की है। (ET Hindi)
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