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16 फ़रवरी 2009
गुड़ में तेजी का दौर जारी रहने की उम्मीद
गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी से चालू सीजन में गुड़ की उत्पादन लागत बढ़ी है। गुड़ के स्टॉक में भी पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग चार से साढ़े चार लाख कट्टे (एक कट्टा 40 किलो) की कमी आने का अंदेशा है। वैसे भी सीजन की शुरूआत से अभी तक खपत राज्यों की मांग बराबर बनी हुई है। गुड़ के निर्यात में भी पिछले दो सालों से बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे में चालू वर्ष में गुड़ के भाव तेज ही बने रहने की संभावना है।राज्य सरकार द्वारा चालू पिराई सीजन (2008-09) के लिए गन्ने का एसएपी बढ़ाकर 140 से 145 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि गन्ने की पैदावार में भारी कमी के कारण कोल्हू और चीनी मिलों के बीच गन्ना लेने की होड बनी हुई है। जिसके परिणामस्वरूप कोल्हू वाले गन्ने की खरीद 150 से 155 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रहे हैं। ऐसे में चालू वर्ष में गुड़ की उत्पादन लागत पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 20 से 30 फीसदी बढ़ गई है। पिछले साल गन्ने का अच्छी पैदावार होने से कोल्हू वालों को 125 रुपये प्रति क्विंटल से भी 20-25 रुपये कम मूल्य पर गन्ना मिला था।गुड़ की खपत मुख्यत: खाने और पशुआहार में तो होती ही है साथ ही पिछले दो-तीन सालों से इसके निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार वर्ष 2006-07 में देश से यूरोप को करीब 650 करोड़ रुपये का गुड़ निर्यात किया था। जबकि वर्ष 2007-08 में इसमें 23 फीसदी की बढ़ोतरी होकर करीब 800 करोड़ रुपये का नौ लाख टन गुड़ निर्यात हुआ है। यूरोप की बढ़ती मांग को देखते हुए चालू वर्ष में इसके निर्यात में और भी बढ़ोतरी की संभावना हैं।मुजफ्फरनगर मंडी में गुड़ का स्टॉक अभी तक मात्र 4.04 लाख कट्टों का ही हो पाया है जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में मुजफ्फरनगर मंडी में लगभग सात लाख कट्टों का स्टॉक हो चुका था। पिछले सीजन में कुल स्टॉक लगभग 14 से 14.50 लाख कट्टों का हुआ था जबकि चालू सीजन में कुल स्टॉक मात्र दस लाख कट्टों का ही होने का अनुमान है। मुजफ्फरनगर मंडी में इस बार सीजन में अधिकतम दैनिक आवक 14-15 हजार कट्टों की ही हो पाई। जबकि पिछले सीजन में इन दिनों दैनिक आवक 24 से 25 हजार कट्टों की हो रही थी। आवक में गिरावट को देखते हुए इस बार कुल स्टॉक में भारी कमी आने की आशंका है जिससे तेज ही रह सकते हैं। गुड़ की तेजी-मंदी काफी हद तक चीनी मिलों की उत्पादन अवधि पर निर्भर करेगी। अगर चीनी मिलें चालू महीने के आखिर तक बंद हो जाती हैं तो फिर कोल्हू वालों को गन्ना ज्यादा मिलेगा। लेकिन अगर मिलें मार्च महीने में भी चालू रहती है तो फिर कोल्हू वालों को गन्ना कम मिल पाएगा। उधर दक्षिण भारत की जुन-जूलाई महीने में आने वाली गन्ने की फसल की पैदावार कैसी रहती है, उस पर भी गुड़ की तेजी-मंदी निर्भर करेगी। मंडी में इस समय गुड़ चाकू के भाव 730 -765 रुपये प्रति कट्टा चल रहे हैं। (Business Bhaskar.....R S Rana)
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