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20 फ़रवरी 2009
सरकार को गेहूं का स्टॉक बढ़ने की चिंता
मुंबई: गेहूं का अधिक स्टॉक होने की चिंता सरकार को सताने लगी है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि 1 अप्रैल से मार्केटिंग सीजन शुरू होने के बाद सरकार का गेहूं स्टॉक और बढ़ सकता है। इस दौरान सरकार भंडारण शुरू करेगी। इसे ध्यान में रखते हुए फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई), पंजाब और हरियाणा ने अतिरिक्त गेहूं भंडारण के प्रयास शुरू कर दिए हैं। गेहूं उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान के नाम शामिल है, लेकिन भंडारण की समस्या केवल पंजाब और हरियाणा में है। नाम न छापने की शर्त पर दिल्ली की एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, 'एफसीआई और राज्य सरकारें सीएपी (कवर्ड एंड प्लिंथ) भंडारण सुविधा के लिए सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) और स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (एसडब्ल्यूसी) से जगह किराए पर लेने की कोशिश कर रही हैं।' आमतौर पर स्टॉक को गोदाम में रखा जाता है, लेकिन जब जगह की कमी होती है और गेहूं-धान का अच्छा स्टॉक होता है तो उसे खुले में रखा जाता है, जिसे सीएपी स्टोरेज कहते हैं। अधिकारी का कहना है कि पंजाब और हरियाणा ने पहले ही सीएपी स्टोरेज के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं और उन्हें कुछ प्रतिक्रिया भी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि इस साल 200-225 लाख टन गेहूं के भंडारण का अनुमान है। इसमें से करीब 40-45 लाख टन सीएपी स्टोरेज के तहत रखा जाएगा। अनुमान के मुताबिक, पंजाब 115 लाख टन, हरियाणा 55 लाख टन और उत्तर प्रदेश करीब 30 लाख टन गेहूं खरीदेगा। 2008-09 में सरकार ने 2.27 करोड़ टन गेहूं का भंडारण किया था। 2009-10 मार्केटिंग सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य को 80 रुपए बढ़ाकर 1,080 रुपए प्रति क्विंटल करने से इस बार गेहूं का स्टॉक बढ़ सकता है। सरकारी अनुमान के अनुसार, 1 अप्रैल 2009 को गेहूं का स्टॉक 98.9 लाख टन के स्तर को छू जाएगा जबकि बफर नियमों के मुताबिक इसे 40 लाख टन होना चाहिए। इसके अलावा 30 लाख टन का रणनीतिक भंडार भी है। गेहूं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को लेकर सरकार को अभी भी निर्णय लेना है। इसके अलावा भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज में गेहूं का वायदा कारोबार भी बंद कर दिया गया है। कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट रेगुलेटर एफएमसी उम्मीद कर रहा था कि फसल अच्छी होने पर एक्सचेंज पर गेहूं के वायदा कारोबार को फिर इजाजत मिल जाएगी। (ET Hindi)
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