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25 फ़रवरी 2009
केंद्र ने राज्य सरकारों से गेहूं का स्टॉक खरीदने को कहा
नई दिल्ली: इस सीजन के गेहूं खरीद के लिए बातचीत शुरू होने के साथ ही सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, बफर स्टॉक में अभी भी पिछले साल खरीदे गए गेहूं का 60 फीसदी हिस्सा रखा हुआ है। ऐसे में नई खरीद के बाद स्टॉक रखने के लिए सरकार के पास पर्याप्त जगह नहीं होगी। इसीलिए, केंद्र सरकार ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे बफर स्टॉक से गेहूं बाहर निकाले। गौरतलब है कि अभी भी पिछले साल का 1.36 करोड़ टन गेहूं सरकारी गोदामों में रखा है। इस मामले में खाद्य और कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा, 'पिछले साल राज्यों ने केंद्र सरकार से सार्वजनिक वितरण के लिए अनाज का कोटा बढ़ाने की गुजारिश की थी। इस साल मैं उन्हें बफर स्टॉक से अनाज निकालने को कह रहा हूं।' उन्होंने कहा कि पिछले साल की खरीद का 60 फीसदी गेहूं अभी भी स्टॉक में है जबकि अप्रैल से सरकार इस सीजन के गेहूं खरीदने की तैयारी में है। 2008 में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने गेहूं की रिकॉर्ड 2.2682 करोड़ टन की खरीदारी की थी। इसमें अकेले पंजाब से 1 करोड़ टन, हरियाणा से 52 लाख टन और उत्तरप्रदेश से 31 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। पवार ने कहा, 'मैं पिछले साल खरीदे गए गेहूं को व्यवस्थित करने में लगा हूं, जिसका 60 फीसदी अभी में गोदामों में ही है।' उन्होंने कहा कि यह बड़ी समस्या है क्योंकि सरकार नई खरीद के लिए तैयार है। पिछले हफ्ते सरकार ने संसद में कहा था कि एफसीआई के अनुमान के मुताबिक 2009-10 के रबी सीजन के लिए पंजाब में 43.62 लाख टन और हरियाणा में 44.81 लाख टन गेहूं रखने की अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है। कृषि मंत्री का कहना है कि धान की फसल अच्छी होने और केंद्र के 30 लाख टन गेहूं खरीदने के बावजूद ऐसी दिक्कत चावल के स्टॉक के साथ नहीं होगी। पवार ने किसानों को दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाने को कहा क्योंकि देश सालाना इन चीजों के आयात पर तकरीबन 18,000 करोड़ रुपए खर्च करती है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल पर सरकार हर साल 10,000 करोड़ रुपए और दाल पर 7,000-8,000 रुपए खर्च करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन हालातों को बदलने की जरूरत है क्योंकि ये देश के लिए अच्छा नहीं है। पवार ने किसानों को कहा कि दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाकर देश से बाहर जाने वाली रकम को रोका जा सकता है। (ET Hindi)
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