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23 जनवरी 2009
घरेलू बाजार में टिन का मूल्य इंटरनेशनल मार्केट से कम गिरा
दुनिया भर में छाई औद्योगिक मंदी से सभी बेसमेटल्स की मांग में भारी कमी आई है। जिसका सीधा असर इनके दामों पर देखने को मिला रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिन के दाम पिछले एक साल में 52 फीसदी तक कम हो गये है। हालांकि घरेलू बाजार में यह गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। घरेलू बाजार में टिन के दाम पिछले साल जनवरी में 1200 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गये थे जो अभी 39 फीसदी कम होकर 725 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गये है। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिन के दाम 23,500 डॉलर प्रति टन से कम होकर 11,750 डॉलर प्रति टन पर आ गए है। मेटल्स ट्रेडर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय गुप्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू बाजार दोनों में ही टिन की मांग लगातार कमजोर है। लंदन मेलट एक्सचेंज (एलएमई) में इसका स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है। अक्टूबर 2008 में एलएमई में इसका स्टॉक 5700 टन था। उसके बाद से लगातार इसमें बढ़ोतरी हो रही है। इस समय एलएमई में इसका स्टॉक बढ़कर 8,405 टन हो गया है। पिछले एक महीने में ही इसके स्टॉक में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिसके चलते दामों में भारी गिरावट देखी जा रही है। भारत में टिन की सालाना खपत 4 लाख टन की होती है। जिसमें से 2.5 लाख टन का घरेलू उत्पादन होता है। भारत अपनी जरूरत का 40 फीसदी टिन आयात करता है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2008-09 के पहले तीन महीनों में भारत ने 1612 करोड़ रुपये के टिन का आयात किया है। वित्त वर्ष 2007-08 में 2538 करोड़ रुपये के टिन का आयात किया गया था। भारत में टिन का आयात विशेषकर अमेरिका, युगोस्लाविया और ब्राजील से होता है। देश में इसका उपयोग मुख्य रूप से पैकेजिंग उद्योग में होता है। कमोडिटी विशेषज्ञ अभिषेक शर्मा ने बताया कि भारत में टिन की मांग में आगे आने वाले महीनों में सुधरने की उम्मीद है। (Business Bhaskar)
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