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27 जनवरी 2009
खाद्य तेल पर नहीं लगेगी इंपोर्ट ड्यूटी
नई दिल्ली: सरकार का खाद्य तेल पर आयात शुल्क लगाने का इरादा नहीं है। कीमतों के लिए अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) ने चुनाव होने तक खाद्य तेल की ड्यूटी संरचना में किसी भी बदलाव की संभावना से इनकार किया है। ईजीओएम की अध्यक्षता रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी के पास है। एक ईजीओएम को खास मुद्दों पर मामले को कैबिनेट जैसी किसी उच्च जगह पर जे लाए बगैर निर्णय लेने का अधिकार होता है। ईजीओएम में संबंधित मंत्रालयों और विभागों के कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। कीमतों के लिए बनी बनी ईजीओएम की इस सप्ताह बैठक हुई थी। पिछले साल अप्रैल में महंगाई को नियंत्रित करने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सभी कच्चे खाद्य तेलों से शुल्क को हटा लिया था, लेकिन बाद में नवंबर में दुनिया भर में खाद्य तेल की कीमतों में भारी गिरावट को देखते हुए सोया ऑयल पर 20 फीसदी की इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई थी। उसके बाद से घरेलू तेल उत्पादक संगठन सरकार से सभी कच्चे खाद्य तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाने की मांग कर रहे हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, 'ईजीओएम का मत है कि महंगाई दर में आ रही लगातार गिरावट के बाद भी सरकार को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिससे कीमतों में फिर से तेज बढ़ोतरी हो। कच्चे खाद्य तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाने समेत अधिकतर निर्णय इसी बात को ध्यान में रखते हुए चुनाव तक टाल दिए गए हैं।' हालांकि ईजीओएम ने बासमती चावल के निर्यात पर लगे 8,000 रुपए प्रति टन के निर्यात शुल्क को हटा लिया है। बासमती पर निर्यात शुल्क पिछले साल मई में लगाया गया था। मंत्रियों का समूह इस मामले को लेकर सतर्क है। उसने बासमती के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 1,100 डॉलर प्रति टन कर दिया। वाणिज्य मंत्रालय मांग करता रहा है कि न्यूनतम निर्यात मूल्य को घटाकर 800 डॉलर प्रति टन किया जाए, जिससे भारतीय निर्यातक पाकिस्तानी बासमती निर्यातकों का मुकाबला कर सकें। सरकारी अधिकारी का कहना है, 'हालांकि महंगाई दर गिरकर छह फीसदी के आसपास आ चुकी है, लेकिन सरकार ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहती है जिससे चुनाव से ठीक पहले कीमतों को फिर बढ़ने का मौका मिले।' (ET Hindi)
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