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22 जनवरी 2009
कृषि मंत्री के तीन बयानों के बीच चीनी उत्पादन 40 लाख टन गिरा
चीनी उत्पादन को लेकर केंद्र सरकार अभी भी अंधेरे में ही तीर चला रही है। पिछले दो महीनों में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ही देश के चीनी उत्पादन को लेकर अटकलें लगा रहे हैं। इस मुद्दे पर उनके बयान लगातार बदल रहे हैं। उनके पहले और ताजा बयान के बीच अनुमानित चीनी उत्पादन में 40 लाख टन की कमी आ चुकी है। सरकार के उत्पादन संबंधी प्रारंभिक और नवीनतम अनुमान में इस अंतर से सरकार के अनुमानों की विश्वसनियता ही संदेह के घेरे में आ गई है।27 नवंबर 2008 में पवार ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में मौजूदा पिराई वर्ष 2008-09 के लिए 220 लाख टन चीनी का अनुमान लगाया था। उसके बाद 22 दिसंबर को इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन (इसमा) की सालाना आम बैठक के अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्पादन कम होकर 200 लाख टन के करीब ही रहेगा। इसके करीब एक माह बाद यानि गत मंगलवार को उन्होंने देश में सिर्फ 180 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान बताया। यह मौका था, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 80वीं आम बैठक। उनके इन बयानों के चलते बाजार में सट्टेबाजों को अपना खेल करने का पूरा-पूरा मौका मिल गया है। इसी का नतीजा है कि पिछले दो महीने में घरेलू बाजार में चीनी के दाम 16 फीसदी तक बढ़ गए हैं।दो माह पहले घरेलू बाजार में एम ग्रेड चीनी के दाम 1850 रुपये प्रति क्विंटल थे जो 22 दिसंबर को इस्मा की सालाना बैठक के समय दाम 1982 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस समय चीनी के दाम बढ़कर 2135 रुपये प्रति क्ंिवटल हो गये हैं। केवल चीनी के मामले में ही नहीं दूसरे खाद्यान्नों के उत्पादन को लेकर भी उनकी ओर से लगातार इस तरह के बयान आते रहे हैं। जिनमें अनुमान तेजी से बदलते रहे। देश के कृषि मंत्री होने के बयान पवार के एक बयान आवश्यक वस्तुओं के दामों में अच्छा-खासा भूचाल आ सकता है। उनके बदलते बयानों का कमाल चीनी पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। (Business Bhaskar)
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